Varanasi News: अखिलेश यादव ने बताई PDA की नई परिभाषा; बोले- 'पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक के साथ पीड़ित ब्राह्मण भी PDA का हिस्सा'
काशी पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने PDA का बढ़ाया दायरा; कहा- जैन, बौद्ध, सिख और ईसाई के साथ समाज का हर पीड़ित व्यक्ति हमारे साथ।
राजनीतिक डेस्क, भदैनी मिरर (वाराणसी): समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी दौरे के दौरान अपने बहुचर्चित राजनीतिक फॉर्मूले PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की व्यापक और नई परिभाषा साझा की है। उन्होंने कहा कि PDA का दायरा सिर्फ कुछ गिने-चुने वर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज का हर वो इंसान जो किसी भी रूप में पीड़ित है—चाहे वह ब्राह्मण ही क्यों न हो—वह PDA परिवार का हिस्सा है।
वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सपा प्रमुख ने PDA के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर खुलकर बात की।
अल्पसंख्यकों में सभी धर्मों का समावेश
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि PDA में अल्पसंख्यक (A) का मतलब सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है।
"जब हम अल्पसंख्यक समुदाय की बात करते हैं, तो उसमें हमारे मुस्लिम भाइयों के साथ-साथ जैन, बौद्ध, पारसी, सिख और ईसाई समुदाय के लोग भी पूरी तरह शामिल हैं। PDA एक ऐसा विशाल मंच है जो हर वंचित और अल्पसंख्यक को सम्मान देता है।"
'पीड़ित ब्राह्मण भी PDA के दायरे में'
पार्टी के समावेशी दृष्टिकोण पर जोर देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि PDA केवल जातिगत समीकरण नहीं, बल्कि संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा:
"अगर समाज का कोई ब्राह्मण भी पीड़ित है या उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह भी PDA का ही हिस्सा माना जाएगा। हमारी लड़ाई हर उस व्यक्ति के न्याय के लिए है जो किसी न किसी रूप में सत्ता या समाज से पीड़ित हुआ है।"
2027 के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश
सपा अध्यक्ष के इस बयान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अपनी सोशल इंजीनियरिंग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। पिछड़े, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ समाज के अन्य वर्गों और अगड़ी जातियों के असंतुष्ट तबके को जोड़ने का यह एक प्रयास है।
अखिलेश यादव ने दोहराया कि समाजवादी पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की पक्षधर है और आगामी चुनावों में PDA का यह व्यापक स्वरूप ही सबसे बड़ी ताकत बनेगा।