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वाराणसी: ₹50 करोड़ के जमीन विवाद में नया मोड़, आरोपों पर पहली बार सामने आया आरोपी भतीजा; भाजपा नेता का नाम आने पर कही ये बात

विशाल मिश्रा ने बड़े पिता के आरोपों को बताया निराधार; कहा- 'इलाज और कर्ज चुकाने के लिए खुद बेची थी जमीन, मेरे पास है हर बात का वीडियो और सबूत'।

 

वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): धर्मनगरी वाराणसी में करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन से जुड़े हाई-प्रोफाइल विवाद में सोमवार को एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। अपने सगे बड़े पिता और बड़ी मां की करोड़ों रुपये की जमीन को धोखे से हड़पने और बेचने के आरोपों का सामना कर रहे भतीजे विशाल मिश्रा और उनकी पत्नी पहली बार मीडिया के सामने आए।

एक प्रेस वार्ता के दौरान विशाल मिश्रा और उनकी पत्नी ने बड़े पिता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।

'पैसे खाते में आने के बाद ही बड़े पिता ने खुद की थी रजिस्ट्री'

विशाल मिश्रा ने मीडिया को अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनके बड़े पिता पर काफी कर्ज था और इलाज के लिए उन्हें बड़ी रकम की जरूरत थी। इसी तंगी से उबरने के लिए उन्होंने खुद अपनी मर्जी से 5 बिस्वा जमीन बेचने का फैसला लिया था।

विशाल ने दावा किया:

"सबसे पहले 5 बिस्वा जमीन नितेश राय के नाम रजिस्ट्री की गई थी। रजिस्ट्री करने से पहले जमीन की पूरी धनराशि मेरे बड़े पिता के बैंक खाते में जमा कराई गई थी। पैसे मिलने और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उन्होंने रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर किए। यह पूरी प्रक्रिया दिन के करीब 4:00 से 4:30 बजे के बीच हुई थी, जिसका पूरा वीडियो साक्ष्य के रूप में हमारे पास मौजूद है।"

गिफ्ट डीड (दान) और भाजपा नेता सुरेश सिंह की भूमिका पर बड़ा खुलासा

विशाल मिश्रा ने आगे बताया कि 5 बिस्वा जमीन बेचने के बाद बड़े पिता ने अपनी शेष जमीन उन्हें (विशाल को) दान (Gift Deed) करने की इच्छा जताई थी। बड़े पिता की सहमति और अपने खुद के पिता की राय लेने के बाद ही उन्होंने इस गिफ्ट डीड को स्वीकार किया था।

गिफ्ट डीड में मिली जमीन को आगे बेचने और उसमें भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह का नाम आने पर विशाल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा:

"बाद में हमारे सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया। तब मैंने अपने पिता से बात की और उन्होंने मुझे दान में मिली जमीन को बेचने या बयाना लेने की अनुमति दी। हमें वरुणा उपाध्याय (पिंंटू उपाध्याय) ने रितेश राय, प्रवीण कुमार सिंह और भाजपा नेता सुरेश सिंह से मिलवाया था। सुरेश भैया ने पहले जमीन के सभी कागजात की कानूनी जांच-पड़ताल की और संतुष्ट होने के बाद ही हमारी आर्थिक मदद की। हमने उनके पक्ष में बयाना और सट्टा किया। इस मामले में सुरेश भैया का कोई गलत रोल नहीं है, वे सिर्फ हमारी मदद कर रहे थे। उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते बदनाम किया जा रहा है।"

'आयुष्मान कार्ड की बात सिर्फ एक बहाना, जांच में सामने आएगा सच'

पीड़ित पक्ष द्वारा पूर्व में लगाए गए आरोपों—कि आयुष्मान कार्ड बनवाने और बैंक खाता खुलवाने के बहाने फिंगरप्रिंट और फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी की गई—पर विशाल मिश्रा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड की बात सिर्फ एक बहाना है।

विशाल ने आरोप लगाया कि उनके बड़े पिता को उनके ही परिवार के कुछ लोग कैद की तरह रखते हैं और उनकी सही तरीके से दवा-दर्पण नहीं होने देते। विशाल के अनुसार, उनके बड़े पिता ने खुद अपनी मर्जी से नया सिम कार्ड लिया, बैंक खाता खुलवाया और अपने आधार कार्ड में जरूरी सुधार करवाए थे, जिसकी उन्हें पूरी जानकारी थी।

विशाल मिश्रा और उनकी पत्नी ने अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस संवेदनशील और बड़े मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

क्या है मूल मामला?

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले विशाल मिश्रा के बड़े पिता और बड़ी मां ने पुलिस व प्रशासन से शिकायत की थी कि उनके भतीजे ने धोखाधड़ी और साजिश के तहत उनकी करोड़ों रुपये मूल्य की कीमती जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम कराकर बेच दिया है। अब दोनों पक्षों के दावों के बीच इस हाई-प्रोफाइल मामले की असल सच्चाई पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही साफ हो पाएगी।