वाराणसी: गंगा नदी में डूब रहे बिहार के युवक के लिए देवदूत बनी NDRF, दांडी घाट पर ऐसे बची जान
गंगा के दांडी घाट पर NDRF के जवानों ने दिखाई जांबाजी, 20 साल के युवक को गहरे पानी से निकाला सुरक्षित
वाराणसी (भदैनी मिरर): धर्मनगरी काशी के घाटों पर तैनात 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ (NDRF) के जवानों की मुस्तैदी से आज सुबह एक बड़ा हादसा टल गया। गंगा नदी के दांडी घाट पर स्नान के दौरान गहरे पानी में डूब रहे बिहार के एक युवक को NDRF के जांबाज बचावकर्मियों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जवानों की इस त्वरित कार्रवाई और हौसले को देखकर घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ टीम की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
डूबते ही नदी में कूद पड़े जांबाज बचावकर्मी
जानकारी के अनुसार, आज प्रातः लगभग 07:30 बजे दांडी घाट पर एनडीआरएफ की टीम पिकेट और पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात थी। इसी दौरान टीम ने देखा कि एक युवक स्नान करते समय अचानक अनियंत्रित होकर गहरे पानी में समाने लगा और डूबने लगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सुरक्षा में तैनात एनडीआरएफ के गोताखोरों और बचावकर्मियों ने बिना एक पल गंवाए उफनती नदी में छलांग लगा दी।
जवानों ने बेहद तेजी और सूझबूझ का परिचय देते हुए डूब रहे युवक को पानी के भीतर ही संभाल लिया और सुरक्षित तरीके से खींचते हुए नदी तट (घाट) पर ले आए।
बिहार का रहने वाला है युवक
सुरक्षित बचाए गए युवक की पहचान 20 वर्षीय रिशुराज के रूप में हुई है। वह श्री सतीश कुमार पटेल का पुत्र है और मूल रूप से नालंदा, बिहार का निवासी है। समय रहते हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन के कारण युवक की जान बाल-बाल बच गई। वाराही घाट और दांडी घाट पर मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस साहसिक रेस्क्यू को अपनी आंखों से देखा और एनडीआरएफ की तत्परता, दक्षता एवं जनसेवा की भावना को सलाम किया।
डीआईजी ने की अपील: मानसून में बरतें अतिरिक्त सावधानी
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक (DIG) श्री मनोज कुमार शर्मा ने आम जनता और काशी आने वाले श्रद्धालुओं से जल सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।
"नदियों एवं अन्य जलाशयों में स्नान या किसी भी गतिविधि के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। लोग गहरे पानी में जाने से बचें, घाटों पर लगे चेतावनी संकेतों पर ध्यान दें और तैनात सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।" - मनोज कुमार शर्मा, डीआईजी (NDRF)
उन्होंने विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा कि मानसून के मौसम में गंगा नदी का जलस्तर और जलधाराओं का वेग अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही डूबने की घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी जरिया है। एनडीआरएफ हमेशा जनता की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुस्तैद है।