वाराणसी नाग पंचमी विशेष: जिस सांप का नाम लोग सुन कर भयभीत होते है "रतन" उसको पलक झपकते ही पकड़ लेते है
काशी के ‘सर्पमित्र’: 25 वर्षों से बिना हथियार 22,000 जहरीले सांपों को दे चुके हैं नया जीवन
नाग पंचमी विशेष
वाराणसी। क्षेत्र में सोमवार को मंदिरों और शिवालों में नागपंचमी के विशेष पर्व पर आस्था की भीड़ देखने को मिली। बताता दे कि नागपंचमी सनातन धर्म का एक पावन पर्व है, जिस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूरे विधि-विधान से दूध व लावा अर्पित कर पूजा की जाती है। हालांकि, इंसानों के बीच सांप का डर इतना गहरा है कि घर या आबादी में दिखते ही लोग लाठी-डंडे निकाल लेते हैं। यद्यपि सांप इंसानों का दुश्मन नहीं है, फिर भी सही जानकारी न होने और समय पर इलाज न मिलने से भारत में हर साल सर्पदंश से लगभग 50,000 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। वाराणसी के मिर्जामुराद क्षेत्र के रहने वाले सर्पमित्र रतन गुप्ता इस तस्वीर को बदलने की मुहिम में जुटे हैं। रतन बीते 25 सालों से बिना किसी डर के, केवल एक सामान्य छड़ी की मदद से खतरनाक और जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। वे अब तक 22,000 से अधिक सांपों को सकुशल पकड़कर जंगलों में सुरक्षित छोड़ चुके हैं। उनकी इस साहसिक और नेक पहल की चर्चा वाराणसी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों में बनी रहती है।
एक फोन कॉल और रेस्क्यू के लिए तैयार
वाराणसी या नजदीकी जिलों से सूचना मिलते ही रतन गुप्ता बिना देर किए मौके पर पहुंचते हैं। वे कहते हैं: "सांप देखते ही लोग डरकर उसे मार डालते हैं, जो कि पर्यावरण के लिहाज से बहुत गलत है। उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले में सर्प मित्रों के नंबर उपलब्ध हैं। सांप दिखने पर उन्हें तुरंत सूचना दी जानी चाहिए। यदि पृथ्वी पर सांप न रहें, तो इंसानों के लिए भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। खेतों में चूहे धान और गेहूं की फसल नष्ट कर देते हैं, और सांप इन चूहों को खाकर प्राकृतिक रूप से फसलों की रक्षा करते हैं।"
सर्पदंश और सांपों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां पूर्वांचल के जहरीले सांप: रतन गुप्ता के अनुसार, पूर्वांचल में मुख्य रूप से चार प्रकार के ही जहरीले सांप पाए जाते हैं—कोबरा (नाग), कॉमन करैत, रसेल वाइपर और पिट वाइपर। इनके अलावा पाए जाने वाले अधिकांश सांप विषहीन होते हैं।
झाड़-फूंक से बचें: यदि कभी जहरीला सांप काट ले, तो झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण होती हैं।
बचाव और सावधानी: सांप अक्सर घरों में रखी सूखी लकड़ियों, उपलों (कंडों) या कबाड़ के ढेर में छिपते हैं। खासकर बरसात के मौसम में इनका बाहर निकलना बढ़ जाता है, इसलिए इन जगहों पर सावधानी बरतनी चाहिए। पर्यावरण संतुलन और बेजुबानों की जान बचाने के इस निस्वार्थ प्रयास के लिए स्थानीय लोग रतन गुप्ता की खूब सराहना कर रहे हैं।