वाराणसी नगर निगम के 3 साल पूरे: अगले दो महीने में 'गार्वेज फ्री' होगा बनारस, 1250 बीघा जमीन कब्जा मुक्त; मेयर ने रखा विजन 2028
बिना गृहकर बढ़ाए राजस्व में 4 गुना रिकॉर्ड वृद्धि, 2775 करोड़ पहुंचा निगम का कुल बजट
वाराणसी (भदैनी मिरर): उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी बनारस अगले दो महीनों के भीतर देश का पहला 'गार्वेज फ्री सिटी' (कूड़ा मुक्त शहर) बनने जा रहा है। नगर निगम वाराणसी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। मेयर पद पर अपने कार्यकाल के तीन गौरवपूर्ण वर्ष पूरे होने के अवसर पर मंगलवार को सिगरा स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने पिछले तीन वर्षों के विकास कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और साल 2028 तक का विजन डॉक्यूमेंट जारी किया।
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स्वच्छता में बड़ी छलांग: 27 में से 23 कूड़ा घर बंद, अब लगेंगे कंपैक्टर
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में जो वाराणसी 41वें स्थान पर था, वह साल 2025 में सुधरकर 17वें स्थान पर पहुंच चुका है और अब हमारा लक्ष्य टॉप-5 में आने का है।
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कंपैक्टर तकनीक: मेयर ने विशेष बातचीत में बताया कि शहर के पारम्परिक कूड़ा घरों को बंद किया जा रहा है। अब तक 27 में से 23 मुख्य डलघर बंद हो चुके हैं। इनकी जगह आधुनिक 'कंपैक्टर' लगाए जा रहे हैं, जहां कूड़ा आते ही सीधे गाड़ियों में लोड होकर प्लांट चला जाएगा, जिससे सड़कों पर गंदगी नहीं दिखेगी।
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सफाई व्यवस्था: सफाईकर्मियों की संख्या 4,075 से बढ़ाकर 7,428 कर दी गई है। प्रमुख मंदिरों और घाटों के मार्गों पर तीनों शिफ्टों में सफाई हो रही है। डिजिटल माध्यम से कर्मियों की तीन बार हाजिरी ली जा रही है।
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बायोमाइनिंग: करसड़ा डंपिंग ग्राउंड में बरसों से जमा 1,264 लाख टन पुराने कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से बायोमाइनिंग द्वारा निस्तारण शुरू हो गया है। इस खाली जमीन पर 'मियावाकी' तकनीक से घने जंगल विकसित किए जा रहे हैं।
आर्थिक अनुशासन: बिना टैक्स बढ़ाए राजस्व में 4 गुना रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वाराणसी नगर निगम ने देश के सामने वित्तीय आत्मनिर्भरता का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। पिछले तीन वर्षों में बिना गृहकर (House Tax) बढ़ाए, बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के बल पर राजस्व वसूली को 94.36 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 415 करोड़ रुपये तक पहुँचाया गया है। इसके चलते निगम का कुल बजट भी 843 करोड़ से बढ़कर 2775.44 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
भू-माफियाओं पर चला चाबुक, 7 अरब की सरकारी जमीन कराई मुक्त
नगर निगम ने पिछले तीन सालों में बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए हैं। इसके तहत शहर की विभिन्न प्राइम लोकेशंस पर अवैध रूप से कब्जा की गई 1250 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराया गया है। बाजार दर के अनुसार इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 7 अरब (700 करोड़) रुपये है। इस जमीन को अब नगर निगम के आधिकारिक 'लैंड बैंक' में शामिल कर लिया गया है, जिसका उपयोग भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं में होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं का हुआ कायाकल्प
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पेयजल और सीवर: 72 करोड़ रुपये की लागत से शहर में 138 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई गई है। वहीं 22 वार्डों में 2161.75 करोड़ की भारी-भरकम लागत से सीवर, सड़क और पानी का एकीकृत कार्य कराया जा रहा है।
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वार्डों की डिजिटल निगरानी: सभी 100 वार्डों (जिनमें नव विस्तारित 25 नए वार्ड भी शामिल हैं) में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की मॉनिटरिंग क्यूआर कोड (QR Code) और कमांड सेंटर के माध्यम से की जा रही है।
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स्मार्ट टॉयलेट्स: स्वच्छ भारत मिशन के तहत 49 नए आधुनिक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हुआ है। इनमें सबसे खास बात यह है कि प्रत्येक शौचालय में ट्रांसजेंडर समाज के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की गई है, जिसका एक प्रमुख उदाहरण लक्सा में बना आधुनिक शौचालय है।
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तालाबों और कुओं का पुनरुद्धार: सीएसआर (CSR) फंड के माध्यम से शंकुलधारा और दुर्गाकुंड समेत शहर के 16 ऐतिहासिक तालाबों का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण किया गया है। इसके अलावा, शहर के विलोपित हो चुके 583 कुओं को साफ कर उनका कायाकल्प किया गया है।
इंटरव्यू में मेयर के दो बड़े और बेबाक बयान
1. शिवाला समेत शहर के 4 कोनों पर बनेंगे अत्याधुनिक मीट मार्केट
शहर के शिवाला जैसे धार्मिक और घने क्षेत्रों में खुले में बिकने वाले मांस-मछली से आने वाली बदबू की समस्या पर मेयर ने बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा:
"काशी एक धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी है, जहाँ देश-विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं। हम किसी के खान-पान को नहीं रोक सकते, लेकिन स्वच्छता से समझौता भी नहीं होगा। सदन और कार्यकारिणी की पूर्ण सहमति से यह निर्णय लिया गया है कि शहर के चारों कोनों पर चार बड़े और अत्याधुनिक मीट मार्केट बनाए जाएंगे। शहर की सभी खुली मांस-मछली की दुकानों को अनिवार्य रूप से वहीं शिफ्ट किया जाएगा।"
2. घाटों पर पुलिस या बाउंसर की तैनाती दुर्भाग्यपूर्ण
गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर पुलिस बनाम बाउंसर के सवाल पर मेयर ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"काशी हमारा घर है और हम सब यहीं के बाशिंदे हैं। यहाँ के नागरिक बेहद जागरूक और धार्मिक रूप से संवेनशील हैं। घाटों की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी हमारी अपनी होनी चाहिए। अगर विश्वप्रसिद्ध घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस या बाउंसर लगाने की नौबत आती है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"
विजन 2028: आगामी 2 वर्षों के महाप्रोजेक्ट्स
पत्रकार वार्ता के अंत में मेयर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने आगामी दो वर्षों की प्राथमिकताओं और 'विजन 2028' का खाका खींचा:
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शिवा थीम पार्क: भेलूपुर क्षेत्र में काशी की संस्कृति को दर्शाता भव्य ‘शिवा थीम पार्क’, वर्ल्ड क्लास फूड प्लाजा और एक आधुनिक संग्रहालय (म्यूजियम) का निर्माण किया जाएगा।
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काशी इंटरप्रिटेशन सेंटर: भेलूपुर में ही 25 एकड़ की विशाल भूमि पर 104 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा इंटरनेशनल पार्क विकसित किया जाएगा।
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पार्किंग संकट से मुक्ति: शहर में यातायात और जाम की समस्या को खत्म करने के लिए अस्सी घाट, मैदागिन, भदैनी और सारनाथ में भव्य पार्किंग स्थलों का निर्माण होगा। इसके अलावा सिगरा स्टेडियम के पास 40.56 करोड़ और लहुराबीर घोड़ा अस्पताल की जमीन पर 34.52 करोड़ से अंडरग्राउंड पार्किंग, होटल और कमर्शियल मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं।
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नमो बनारस केंद्र: बुनकरों और स्थानीय हस्तशिल्प व्यापारियों को वैश्विक मंच देने के लिए 145.36 करोड़ की लागत से आधुनिक 'नमो बनारस केंद्र' का निर्माण जारी है।
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खेल और सामाजिक सरोकार: शहर में महिलाओं के लिए सुरक्षित 'वर्किंग वूमेन हॉस्टल' और युवाओं के लिए 5 नए स्पोर्ट्स सेंटर बनाए जाएंगे। साथ ही 40 और कुंडों तथा 1000 कुओं के शुद्धिकरण का काम पूरा किया जाएगा।
इस प्रेस वार्ता के दौरान उपसभापति नरसिंह दास सहित नगर निगम के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और कार्यकारिणी के सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।