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Varanasi: हॉरमुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की हत्या के खिलाफ बनारस में उबाल, वामपंथी दलों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा

अमेरिकी साम्राज्यवाद और केंद्र सरकार की 'नरम' नीति पर भड़के वामपंथी नेता; देवरिया के मृतक नाविक समेत सभी पीड़ितों के लिए मुआवजे और अमेरिका से माफी की मांग।

 

वाराणसी, भदैनी मिरर: हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी सेना द्वारा तीन भारतीय नाविकों की हत्या किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना और इस पर केंद्र सरकार के रुख के विरोध में गुरुवार (18 जून 2026) को वाराणसी जिला मुख्यालय पर वामपंथी दलों ने संयुक्त रूप से जोरदार प्रदर्शन किया। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा माले (लिबरेशन) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नेताओं ने संयुक्त रूप से जिलाधिकारी (डीएम) वाराणसी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।

अमेरिकी दादागिरी और केंद्र की चुप्पी पर उठाए सवाल

सौंपे गए ज्ञापन में वामपंथी दलों ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सरेआम उल्लंघन करते हुए तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की जान ले ली। बेहद चिंताजनक बात यह है कि जब भारत सरकार ने इस पर बेहद दबी जुबान में आपत्ति जताई, तो अमेरिका ने उल्टा धमकी भरे लहजे में कह दिया कि नियमों के उल्लंघन पर आगे भी ऐसी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वामपंथियों का कहना है कि मोदी सरकार देश की संप्रभुता की हिफाजत करने और इस मुद्दे पर अमेरिका का कड़ा विरोध करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। सरकार को बड़े मंचों पर अमेरिकी साम्राज्यवाद की खुलकर निंदा करनी चाहिए।

साम्राज्यवादी ताकतों के आगे न झुके सरकार: अनिल कुमार सिंह प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सीपीआईएम (CPIM) के जिला सचिव अनिल कुमार सिंह ने 'भदैनी मिरर' से बातचीत में कहा, "आज वामपंथी दलों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। हमारी साफ मांग है कि देश के हुक्मरान साम्राज्यवादी ताकतों के आगे झुकना बंद करें। मारे गए नागरिकों को उचित आर्थिक मुआवजा मिले और अमेरिका को सख्त चेतावनी दी जाए। अगर देश की संप्रभुता पर चोट होगी, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।"

पूरी दुनिया पर एकछत्र राज करना चाहता है अमेरिका: मिठाई लाल

भाकपा माले (CPI ML) राज्य कमेटी के सदस्य मिठाई लाल ने केंद्र की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया पर अपनी तानाशाही चलाना चाहता है। उन्होंने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारा देश आज उन ताकतों के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है जो पूरी दुनिया का उत्पीड़न कर रही हैं। हमारी मांग है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को उठाकर हमारे नाविकों को न्याय दिलाया जाए और देश के प्रधानमंत्री इस ढुलमुल नीति को छोड़कर देश से माफी मांगें।"

वामपंथी दलों की मुख्य मांगें:

  1. मुआवजे की घोषणा: हॉरमुज जलडमरूमध्य में मारे गए तीनों भारतीय नाविकों (जिसमें एक उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी हैं) के परिजनों को तत्काल पर्याप्त आर्थिक मुआवजा और सरकारी सहायता दी जाए।

  2. कड़ा कूटनीतिक विरोध: भारत सरकार अमेरिकी साम्राज्यवाद की खुलकर निंदा करे और इस कायरतापूर्ण कृत्य के लिए अमेरिकी प्रशासन से बिना शर्त माफी मंगवाए।

  3. दक्षिण एशियाई देशों की एकजुटता: भारत अपनी संप्रभुता और वैश्विक साख को मजबूत करने के लिए दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों को एकजुट करे और इस तानाशाही के खिलाफ उनकी अगुवाई करे।

मामले में जिला प्रशासन ने वामपंथी नेताओं को आश्वस्त किया है कि उनके इस पत्रक को तुरंत उचित माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति कार्यालय, नई दिल्ली को प्रेषित कर दिया जाएगा।