वाराणसी: कलयुगी मां-बाप ने नवजात को खेत में फेंका, रोहनिया पुलिस बनी देवदूत, लावारिश को अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
'जाको राखे साइयां मार सके ना कोय'- थाना प्रभारी राजू सिंह की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता से नवजात को मिला नया जीवन, क्षेत्र में हो रही सराहना
वाराणसी (भदैनी मिरर)। "जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय। बाल न बांका करि सके, जो जग बैरी होय।।" संत कबीर की यह पंक्तियां मंगलवार को रोहनिया थाना क्षेत्र में उस वक्त चरितार्थ होती दिखीं, जब कुछ ही घंटे पहले जन्म ले चुके एक असहाय नवजात शिशु को मौत के मुंह से खींचकर नया जीवन दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, लोकलाज और सामाजिक भय के कारण किसी निर्दयी ने आज ही जन्मे एक मासूम नवजात को खेत में मरने के लिए फेंक दिया था। ठंड, भूख और असहायता से तड़प रहा वह मासूम जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।
थाना प्रभारी की त्वरित कार्रवाई ने बचाई जान
जैसे ही इस घटना की सूचना रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह को मिली, वे बिना एक पल गंवाए पुलिस टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने औपचारिकताओं के इंतजार के बजाय प्राथमिकता के आधार पर बच्चे को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया, जिससे नवजात की हालत स्थिर हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने के कारण बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।
कर्तव्य से परे इंसानियत की मिसाल
अक्सर पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण तक सीमित मानी जाती है, लेकिन थाना प्रभारी राजू सिंह के इस कदम ने खाकी के मानवीय और संवेदनशील चेहरे को सामने रखा है। उनके इस साहसिक और तत्परतापूर्ण कार्य की क्षेत्र के लोग मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं।
जहाँ एक ओर कलयुगी माता-पिता या परिजनों के इस घिनौने कृत्य को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और हर कोई उन्हें कोस रहा है, वहीं दूसरी ओर राजू सिंह जैसे अधिकारियों की संवेदनशीलता समाज में खाकी के प्रति विश्वास और आशा की नई किरण जगाती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सच्चा पुलिसकर्मी वही है जो न केवल अपराध रोके, बल्कि संकट में पड़े किसी असहाय का जीवनरक्षक भी बने। थाना प्रभारी राजू सिंह के इस सराहनीय और नेक कार्य को क्षेत्र का
हर नागरिक सलाम कर रहा है।