वाराणसी: अस्सी के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में बाधा, अवैध कब्जाधारकों पर कार्रवाई की मांग
240 साल पुराने मंदिर के संरक्षण कार्य को रोकने की साजिश; पूर्वजों की धरोहर को बचाने के लिए दीपक शापुरी ने पुलिस-प्रशासन से मांगी सुरक्षा
भदैनी मिरर, वाराणसी: काशी की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासतों में अद्वितीय स्थान रखने वाले अस्सी स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य में बाधा उत्पन्न करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ अवैध कब्जाधारकों और असामाजिक तत्वों द्वारा मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में 'ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी, अस्सी, वाराणसी' के संरक्षक ट्रस्टी एवं पंडित बेनी प्रसाद शापुरी के वैधानिक वारिस दीपक शापुरी ने जिला प्रशासन और पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
240 वर्ष से अधिक पुराना है मंदिर का गौरवशाली इतिहास
संरक्षक ट्रस्टी दीपक शापुरी ने बताया कि अस्सी क्षेत्र का यह श्री जगन्नाथ मंदिर एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है। इसका निर्माण लगभग वर्ष 1780 से 1790 के बीच उनके पूर्वज पंडित बेनी राम जी एवं विशंभर पंडित जी द्वारा कराया गया था। पिछले दो सौ से अधिक वर्षों से शापुरी परिवार ही इस मंदिर की धार्मिक परंपराओं, नित्य पूजा-अर्चना और काशी की विश्वप्रसिद्ध 'श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव' के सकुशल संचालन और संरक्षण का दायित्व निभाता आ रहा है।
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न्यायालय के आदेश पर गठित ट्रस्ट करा रहा है सौंदर्यीकरण
उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रखने के लिए वर्ष 1989 में माननीय न्यायालय के आदेशानुसार एक सार्वजनिक ट्रस्ट का गठन किया गया था। वर्तमान में मंदिर परिसर की प्राचीनता, धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक महत्व को अक्षुण्ण रखने के लिए सर्वसम्मति से गठित समिति के माध्यम से जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है। इस समिति के अध्यक्ष बृजेश सिंह और सचिव शैलेश त्रिपाठी हैं।
समाधि स्थल पर कब्जा और पवित्र क्षेत्र में रसोई चलाने का आरोप
दीपक शापुरी ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में कुछ ऐसे लोग अवैध रूप से निवास कर रहे हैं, जिनका मंदिर प्रशासन या ट्रस्ट से कोई वैधानिक संबंध नहीं है। ये लोग केवल अपना अवैध कब्जा बनाए रखने के लिए विकास कार्य में लगातार व्यवधान डाल रहे हैं और श्रमिकों को डरा-धमका रहे हैं।
शिकायत के अनुसार:
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पूर्व में हटाए गए एक पुजारी के दो भाई वर्तमान में परिसर में अवैध रूप से रह रहे हैं।
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इनमें से एक व्यक्ति ने पूज्य तेजोनिधि ब्रह्मचारी जी के पवित्र समाधि स्थल पर अवैध कब्जा कर रखा है।
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दूसरे व्यक्ति ने मंदिर के अत्यंत पवित्र क्षेत्र में अपनी निजी रसोई संचालित कर रखी है, जिससे मंदिर की धार्मिक शुचिता और मर्यादा खंडित हो रही है।
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ये लोग खुद को फर्जी तरीके से मंदिर का पुजारी या सेवायत बताकर श्रद्धालुओं को गुमराह कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट द्वारा इनकी सेवाएं काफी पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं और वर्तमान में मंदिर के अधिकृत पुजारी राधेश्याम जी हैं।
अतीत के अदालती विवादों का दिया हवाला
दीपक शापुरी ने बताया कि मंदिर की भूमि पर कब्जे का यह खेल नया नहीं है। अतीत में मंदिर की देखरेख के लिए रखे गए कर्मचारी स्वर्गीय सकल नारायण सिंह पर भी अवैध कब्जे और अवैध वसूली के आरोप लगे थे। लंबा कानूनी विवाद चलने के बाद माननीय उच्च न्यायालय (High Court) ने ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके बाद उन्हें बेदखल किया गया था। इसी तरह एक अन्य पुजारी श्रीराम शर्मा को भी प्रशासनिक और पुलिसिया कार्रवाई के बाद पद से हटाकर बाहर किया गया था। अब उनके रिश्तेदार मंदिर की भूमि पर स्थायी कब्जा जमाने की फिराक में हैं।
प्रशासन से सुरक्षा और बेदखली की मांग
दीपक शापुरी ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
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मंदिर परिसर में रह रहे अनाधिकृत व्यक्तियों के दस्तावेजों की जांच कर उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत तत्काल बेदखल किया जाए।
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ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार कार्य में बाधा पहुंचाने और माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
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मंदिर परिसर में निर्माण कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा बल तैनात किया जाए।