वाराणसी : नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने वाला गिरोह पकडाया, 6 से पूछताछ जारी, सैकड़ों युवा बने शिकार
सारनाथ के नई बाजार में पुलिस की बड़ी छापेमारी; सोशल मीडिया पर ऐड डालकर फंसाते थे जाल में, सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर लाखों की वसूली
भदैनी मिरर, वाराणसी: उत्तर प्रदेश की वाराणसी पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरप्रांतीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। सारनाथ थाना पुलिस ने एक सूचना के आधार पर फर्जी तरीके से संचालित हो रहे एक कॉल सेंटर पर छापेमारी कर गिरोह के 6 सदस्यों को हिरासत में लिया है। यह गिरोह पिछले कई दिनों से सारनाथ थाना क्षेत्र के नई बाजार इलाके में सक्रिय था और युवाओं को अपना शिकार बना रहा था।
मुखबिर की सूचना पर एसीपी के नेतृत्व में छापेमारी
मिली जानकारी के मुताबिक, एसीपी सारनाथ विद्युत सक्सेना के कुशल नेतृत्व में सारनाथ थाना प्रभारी और उनकी टीम ने नई बाजार इलाके में इस ठगी गिरोह के ठिकाने पर अचानक दबिश दी। पुलिस को मंगलवार को मुखबिर के जरिए इन जालसाजों के बारे में पुख्ता जानकारी मिली थी। पुलिस ने मौके से 6 लोगों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी है। पकड़े गए आरोपी खुद को वैध कॉल सेंटर का संचालक बताकर युवाओं को बरगलाते थे।
सोशल मीडिया पर ऐड और फोन कॉल से फैलाया था जाल
पुलिस की शुरुआती जांच में इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
दस्तावेजों की कमी: पुलिस को मौके पर कॉल सेंटर के संचालन या किसी कंपनी से जुड़ाव से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज या प्रमाण नहीं मिले।
सोशल मीडिया का खेल: गिरोह के सदस्य फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'वर्क फ्रॉम होम' या अच्छी नौकरी के विज्ञापन (Ads) डालते थे।
बड़े संपर्कों का झांसा: विज्ञापन देखकर जो युवा संपर्क करते थे, उन्हें आरोपी फोन कॉल के जरिए जाल में फंसाते थे। वे दावा करते थे कि वाराणसी सहित देश की कई बड़ी नामी कंपनियों में उनके मजबूत संपर्क हैं।
रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर ऐंठते थे मोटी रकम
बेरोजगार युवाओं को पूरी तरह अपने भरोसे में लेने के लिए यह गिरोह बकायदा उनका ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवाता था। इसके बाद युवाओं को फर्जी तरीके से शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग भी दी जाती थी ताकि उन्हें जरा भी शक न हो।
सैकड़ों युवा हुए शिकार: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद या जॉइनिंग लेटर देने के नाम पर ये जालसाज 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' और फाइल चार्ज के रूप में प्रति छात्र हजारों रुपये की वसूली करते थे। पुलिस के अनुसार, अब तक देश और राज्य के सैकड़ों युवक-युवतियां इस गिरोह के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके हैं।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त, जांच में जुटी पुलिस
सारनाथ पुलिस ने ठगी के इस दफ्तर से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में ले लिए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए 6 आरोपियों से सघन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह का नेटवर्क कहाँ-कहाँ फैला है और इनके बैंक खातों में ठगी की कितनी रकम ट्रांसफर हुई है। पुलिस उन युवाओं से भी संपर्क करने का प्रयास कर रही है जो इस गिरोह का शिकार बने हैं, ताकि उनके बयानों के आधार पर केस को और मजबूत किया जा सके।