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Varanasi Flood Relief: वाराणसी में बाढ़ शिविरों के निरीक्षण पर निकले DM सत्येंद्र कुमार

हुकुलगंज और ढेलवरिया के राहत शिविरों का जायजा; बच्चों को बांटी चॉकलेट, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं का लिया हिसाब

 

भदैनी मिरर (वाराणसी डेस्क): वाराणसी जिले में बाढ़ की विभीषिका के बीच जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार (4 सितंबर 2026) को जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने हुकुलगंज और ढेलवरिया क्षेत्र स्थित विभिन्न बाढ़ राहत शिविरों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच बैठकर उनका हाल-चाल जाना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को राहत व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के कड़े निर्देश दिए।

जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर राहत शिविरों में रह रहे लोगों ने राहत की सांस ली और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।

शिविरों में खान-पान और मेडिकल व्यवस्था के सख्त निर्देश

जिलाधिकारी ने दीप्ति कॉन्वेंट स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर, तुलसी निकेतन, प्राथमिक विद्यालय (ढेलवरिया) और नवयुग विद्या मंदिर में बने राहत केंद्रों का दौरा किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने निम्नलिखित मुख्य निर्देश जारी किए:

  • ससमय भोजन व पोषाहार: प्रभावितों को दोनों समय का गुणवत्तापूर्ण भोजन और सुबह का नाश्ता हर हाल में समय से मिले। बच्चों के लिए दूध और ताजे फल की अलग से व्यवस्था हो।

  • 24 घंटे मेडिकल टीम: दीप्ति कॉन्वेंट स्कूल शिविर में डॉक्टर से चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी लेते हुए डीएम ने निर्देश दिया कि राहत केंद्रों पर 24 घंटे मेडिकल टीम तैनात रहे।

  • विशेष देखभाल: बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं खान-पान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

  • रसोई में स्वच्छता: राहत केंद्रों की रसोई में जाकर खुद भोजन निर्माण देखा और रसोइयों को सफाई के साथ खाना बनाने की हिदायत दी।

मासूमों के चेहरे पर दिखी मुस्कान

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय और तुलसी निकेतन शिविर में बच्चों से भी आत्मीय बातचीत की। उन्होंने बच्चों से शिविर में मिल रही सुविधाओं के बारे में पूछा और उन्हें चॉकलेट भी बांटी, जिससे बच्चों के चेहरे पर खुशी खिल उठी।

'सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता'

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित हर नागरिक की सुरक्षा, स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण भोजन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को चौबीसों घंटे सक्रिय रहकर जमीनी स्तर पर राहत कार्य संचालित करने का आदेश दिया है।