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वाराणसी में फायर ब्रिगेड की होटल और गेस्ट हाउसों में सघन चेकिंग, मानकों की अनदेखी पर 10 को नोटिस

34 होटलों में जांच के बाद अल्टीमेटम: एक महीने में फायर सेफ्टी मानक पूरे नहीं किए तो सील होंगे प्रतिष्ठान

 

भदैनी मिरर, वाराणसी: दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद वाराणसी जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग (Fire Department) पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। घटना के दूसरे दिन गुरुवार को भी शहर के घने और संभ्रांत इलाकों में फायर ब्रिगेड की टीमों ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) आनंद सिंह राजपूत के निर्देश पर गठित चार विशेष टीमों ने भेलूपुर, परेड कोठी, कोतवाली, छावनी, नदेसर और बावतपुर सहित कई इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया।

इस दौरान कुल 34 होटल, गेस्ट हाउस और होम-स्टे की बारीकी से जांच की गई, जिसमें से 10 प्रतिष्ठित होटलों और गेस्ट हाउसों में सुरक्षा मानकों की भारी लापरवाही सामने आई है। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी दोषी संचालकों को नोटिस जारी कर एक महीने के भीतर कमियां सुधारने का अल्टीमेटम दिया है। तय समय में मानक पूरे न होने पर इन होटलों को बंद (सील) कराने की चेतावनी दी गई है।

इन 10 होटलों और गेस्ट हाउसों में मिलीं खामियां (Defaulters List)

जांच के दौरान कैंट रेलवे स्टेशन के पास स्थित परेड कोठी और भेलूपुर के निम्नलिखित होटलों में सुरक्षा उपकरण या तो नदारद मिले या खराब स्थिति में पाए गए:

  1. होटल डी पॉल (परेड कोठी)

  2. प्रीति गेस्ट हाउस (परेड कोठी)

  3. बुद्धा गार्डन (परेड कोठी)

  4. शिवम होटल (परेड कोठी)

  5. बैंड कॉन्टिनेंटल (परेड कोठी)

  6. गौतम ग्रैंड (परेड कोठी)

  7. राजकमल (परेड कोठी)

  8. होटल रुद्राक्ष (परेड कोठी)

  9. होटल दयाल (भेलूपुर)

  10. होटल न्यू काशी (भेलूपुर)

फायर टैंक गायब, आपातकालीन निकासी मार्ग बंद

मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि चेतगंज, कोतवाली, भेलूपुर और पिंडरा क्षेत्र की टीमों ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की। जांच के दौरान इन होटलों में निम्नलिखित गंभीर खामियां पाई गईं जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही थीं:

  • फायर हाइडेंट, हौज और मोटर पंप काम नहीं कर रहे थे।

  • आग बुझाने के लिए जरूरी वाटर टैंक और भूमिगत टैंक खाली या गायब मिले।

  • कमरों और कॉरिडोर में स्मोक डिटेक्टर (धुआं पहचानने वाले यंत्र) नहीं लगे थे।

  • होटल में लगे फायर एक्स्टिंगुइशर (अग्निशामक सिलेंडर) की गुणवत्ता बेहद खराब थी।

  • सबसे चिंताजनक बात यह रही कि किसी भी होटल में आपातकालीन निकासी द्वार (Emergency Exit) या तो नहीं था, या उसे बंद कर दिया गया था।

घने इलाकों में स्थिति ज्यादा डरावनी

काशी के संकरे और सघन इलाकों (जैसे परेड कोठी और भेलूपुर) में बने इन बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा के ऐसे बदतर हालात बेहद डरावने हैं। संकरी गलियों के कारण किसी हादसे के वक्त यहाँ दमकल की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल होता है।