वाराणसी: कमिश्नर और डिप्टी सीएम के नाम पर धमकी, 3.85 करोड़ की पुश्तैनी जमीन का फर्जी बैनामा
चकबंदी अधिकारी के आदेश को ठेंगा दिखाकर भू-माफियाओं ने हड़पी पैतृक संपत्ति, गवाहों के साथ मिलकर रची बड़ी साजिश; कमिश्नर के आदेश के बाद भी नहीं दर्ज हुआ मुकदमा
भदैनी मिरर, वाराणसी: धर्म की नगरी काशी में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अब सूबे के उपमुख्यमंत्री और जिले के आला पुलिस अधिकारियों के नाम का सहारा लेकर आम जनता को धमकाने और उनकी कीमती जमीनों को हड़पने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला वाराणसी के थाना रोहनिया अंतर्गत ग्राम शहावाबाद और दरेखू का है, जहां महज 0.006 हेक्टेयर के वैधानिक हकदार ने भू-माफियाओं और दलालों के साथ मिलकर अन्य पांच सगे भाइयों के वारिसों की करोड़ों रुपये मूल्य की पुश्तैनी जमीन और तीन मंजिला मकान का फर्जी बैनामा कर दिया। पीड़ित ने जब इसकी शिकायत की, तो उसे प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और पूर्व कैबिनेट मंत्री नारद राय के नाम पर धमकियां दी जा रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित राजेंद्र प्रसाद सिंह (पुत्र स्वर्गीय विश्वनाथ सिंह, निवासी शहावाबाद, रोहनिया) ने पुलिस कमिश्नर को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित के अनुसार, उनके दादा स्वर्गीय दान बहादुर सिंह की मृत्यु के बाद उनके छह पुत्रों (बैजनाथ सिंह, विश्वनाथ सिंह, भोलानाथ सिंह, विद्यानाथ सिंह, दीनानाथ सिंह व देवमूर्ति शर्मा उर्फ दिनेश) को पैतृक संपत्ति में बराबर ($1/6$) का वैधानिक हिस्सा मिला था।
चाचा स्वर्गीय देवमूर्ति शर्मा उर्फ दिनेश ने अपने जीवनकाल में ही अपने हिस्से की अधिकांश जमीन बेच दी थी, जिसके बाद उनके वारिसों (आजाद कुमार भारद्वाज, अरविंद भारद्वाज व पत्नी जड़ावती देवी) के पास खाता संख्या-409 में महज 0.008 हेक्टेयर जमीन शेष बची थी। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी वाराणसी ने भी अपने निर्णय (दिनांक 26.08.2025) में आजाद कुमार भारद्वाज का वैधानिक अंश मात्र 0.006 हेक्टेयर ही माना था।
3.85 करोड़ रुपये का फर्जी बैनामा
पीड़ित का आरोप है कि इस सच्चाई को जानते हुए भी आजाद कुमार भारद्वाज ने आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से दलालों और गवाहों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। उसने अन्य सह-खाताधारकों (बाकी पांच भाइयों के वारिसों) की मूल्यवान संपत्ति को अपनी बताते हुए 26 दिसंबर 2025 को लक्सा निवासी मनोहर लाल शेवारमानी, रीना शेवारमानी और रितिक शेवारमानी के पक्ष में 3,85,43,780 रुपये (तीन करोड़ पचासी लाख तिरालीस हजार सात सौ अस्सी रुपये) का कूट रचित (फर्जी) बैनामा कर दिया। इस फर्जीवाड़े में मौजा दरेखू स्थित तीन मंजिला आवासीय भवन (लगभग 2400 वर्ग फीट) को भी अवैध रूप से बेच दिया गया।
साजिश में शामिल गवाह:
इस महाफर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए साजिश के तहत रमेश चन्द्र सिंह (पुत्र बैजनाथ सिंह, निवासी शहावाबाद) और प्रवीण कुमार सिंह (पुत्र राजेंद्र प्रसाद सिंह, निवासी दरैखू) ने आर्थिक लाभ लेकर रजिस्ट्री में झूठी गवाही दी।
डिप्टी सीएम और पुलिस कमिश्नर के नाम पर दी जा रही धमकी
पीड़ित राजेंद्र प्रसाद सिंह का आरोप है कि जब उन्होंने इस जालसाजी का विरोध किया और कानूनी कार्रवाई की बात कही, तो आरोपी और भू-माफिया बौखला गए। आरोपी खुद को बड़े रसूखदार बताते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और पूर्व कैबिनेट मंत्री नारद राय के नाम की धमकियां दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को भी अपने अधीन बताते हुए पीड़ित को चुप रहने और जान से मारने की धमकी दे डाली।
कमिश्नर के कड़े आदेश को भी डकार गई रोहनिया पुलिस
इस गंभीर प्रकरण में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित ने सबसे पहले 16 जनवरी 2026 को थाना प्रभारी रोहनिया को लिखित तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित ने 23 जनवरी 2026 को पुलिस कमिश्नर वाराणसी के जनशिकायत प्रकोष्ठ (संख्या 50/26) में गुहार लगाई।
तत्कालीन पुलिस कमिश्नर महोदय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट आदेश जारी किया था:
"SHO रोहनिया स्वयं कागजातों का परिशीलन करें। अगर घटना सही व प्रमाणित हो तो तत्काल अभियोग पंजीकृत करें। आख्या 10 दिवस में प्रेषित करें।"
आज दिनांक 4 जुलाई 2026 हो चुकी है, यानी महीनों बीत जाने के बाद भी रोहनिया पुलिस कमिश्नर के आदेश को ठंडे बस्ते में डाले बैठी है और आज तक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पीड़ित परिवार अब भी न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।