वाराणसी: चालक ने पुलिस पर लगाया बेरहमी से पिटाई का गंभीर आरोप, पुलिस कमिश्नर से निष्पक्ष जांच की मांग
लालपुर-पांडेयपुर की घटना; धारा 151 में चालान, पुलिस कस्टडी में मारपीट और कागजातों में फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत
वाराणसी / भदैनी मिरर: कमिश्नरेट वाराणसी के लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र में पुलिसिया कार्यप्रणाली और बर्बरता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित वाहन चालक ने पुलिस आयुक्त (पुलिस कमिश्नर) को प्रार्थना-पत्र सौंपकर डीसीपी वरुणा जोन, उनके हमराहियों और थाने के सिपाही पर बुरी तरह से पीटने, कस्टडी में प्रताड़ित करने तथा सरकारी अभिलेखों और चालान में फर्जी विवरण दर्ज करने का आरोप लगाया है।
वीआईपी मूवमेंट के दौरान विवाद और मारपीट का आरोप
पीड़ित वाहन चालक राकेश यादव (वाहन संख्या UP 65 EW 3139) के अनुसार, 5 सितंबर 2026 की शाम लगभग 4:30 से 4:50 बजे के बीच उनका वाहन साइट पर खड़ा था। मुख्यमंत्री के काफिले के आगमन की पूर्व जानकारी न होने के कारण जब पुलिस ने वाहन हटाने को कहा, तो वे स्थान तलाशने लगे। पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान डीसीपी वरुणा जोन और उनके साथ मौजूद 6-7 पुलिसकर्मियों ने उन्हें वाहन से खींचकर पीटा और धारा 151 के तहत निरुद्ध कर वाहन का चालान सीज कर दिया।
थाने के भीतर पुलिस कस्टडी में प्रताड़ना का दावा
प्रार्थना-पत्र में पीड़ित ने आरोप लगाया कि अगले दिन (6 सितंबर 2026) सुबह लगभग 9 बजे थाना परिसर में चोट और दर्द के कारण सफाई करने में असमर्थता जताने पर सिपाही विवेक रावत ने उनकी दोबारा बेरहमी से पिटाई की। पीड़ित का दावा है कि पुलिसिया कार्रवाई में उन्हें गंभीर और घातक चोटें आई हैं, जिनका बाद में निजी तौर पर उपचार कराया गया।
सरकारी अभिलेखों और चालान में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप
चालक ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चालान और अदालती दस्तावेजों में भारी विसंगतियों का खुलासा किया है:
-
गलत तारीख और समय: वास्तविक घटना 5 सितंबर की शाम की है, जबकि पुलिस चालान में घटना की तारीख 2 सितंबर 2026 और समय सुबह 11:33 बजे अंकित किया गया है।
-
चालक का बदला नाम: घटना के समय वाहन राकेश यादव चला रहे थे, जबकि कोर्ट में प्रस्तुत पुलिसिया कागजातों में वाहन मालिक श्री रवींद्र प्रताप सिंह को चालक दर्शाया गया है।
-
मेडिकल में अनदेखी: पुलिस द्वारा कराए गए सरकारी मेडिकल में चोटों का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि पीड़ित के पास इलाज के दस्तावेज उपलब्ध हैं।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांच की मांग
पीड़ित चालक ने पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। घटना से संबंधित सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सुरक्षित किया जाए, इलाज के मेडिकल कागजातों को जांच में शामिल किया जाए और कागजातों में हेरफेर करने वाले दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।