वाराणसी: बारिश में BHU का सर सुंदरलाल अस्पताल जलमग्न, कमर भर पानी में मरीज और तीमारदार दिखे बेबस; OPD प्रभावित
सर सुंदरलाल अस्पताल के OPD और लैब जाने वाले रास्तों पर भारी जलभराव, व्हीलचेयर-स्ट्रेचर थमे, परिजन मरीजों को गोद में उठाने को मजबूर
भदैनी मिरर, वाराणसी। धर्म नगरी वाराणसी में लगातार 15 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश ने पूर्वांचल के सबसे बड़े चिकित्सकीय केंद्र 'सर सुंदरलाल अस्पताल' (BHU) की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल परिसर से लेकर ओपीडी (OPD) और जांच काउंटरों तक पानी लबालब भर गया है। जलजमाव की वजह से ओपीडी में आने वाले हजारों मरीजों और उनके तीमारदारों को भीषण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कमर भर पानी में चलकर OPD पहुंचने की मजबूरी
अस्पताल के मुख्य रास्तों पर कमर तक पानी भरा हुआ है। पर्ची बनवाने वाले काउंटर से लेकर ओपीडी तक पहुंचने के लिए मरीजों को लगभग 150 मीटर तक गहरे गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। पानी का बहाव और गहराई इतनी अधिक है कि मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पूरी तरह बेकार साबित हो रहे हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर पानी के बीच से ले जाने को मजबूर दिखे।
OPD में मरीजों की संख्या घटी, बिना इलाज लौटे लोग
आमतौर पर सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 5,000 से 6,000 मरीज इलाज और चिकित्सीय परामर्श के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जलभराव के विकराल रूप को देखते हुए मरीजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। दर्जनों मरीज और उनके तीमारदार परिसर का दृश्य देखकर बिना डॉक्टर को दिखाए ही वापस लौटने पर मजबूर हो गए।
CCI लैब और विशेष विभागों के रास्तों पर संकट
परामर्श के बाद जब मरीज पैथोलॉजी जांच के लिए 'सीसीआई लैब' (CCI Lab) की ओर बढ़ रहे हैं, तो उन्हें 100 मीटर से अधिक लंबे जलमग्न रास्ते को फिर से पार करना पड़ रहा है।
- जलभराव का सबसे गंभीर असर निम्नलिखित विभागों पर पड़ा है:
- बाल रोग विभाग: छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे अभिभावक पानी के बीच काफी परेशान नजर आए।
- नेत्र एवं ईएनटी (ENT) विभाग: इन विभागों में बुजुर्ग मरीजों की संख्या ज्यादा होती है, जिन्हें कमर भर पानी में चलने में भारी जोखिम उठाना पड़ा।
प्रशासनिक दावों और जल निकासी पर उठे गंभीर सवाल
पूर्वांचल, बिहार और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से आने वाले मरीजों के लिए बीएचयू अस्पताल रीढ़ की हड्डी माना जाता है। संवेदनशील स्वास्थ्य परिसर में इस स्तर का जलभराव प्रशासनिक व्यवस्था और जल निकासी के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि परिसर से पानी निकालने के लिए तुरंत पंप लगाए जाएं और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।