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Varanasi: कर्मचारियों और मजदूरों के हक में सड़क पर उतरा भारतीय मजदूर संघ, 22 सूत्रीय मांगों को लेकर CM योगी के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

पुरानी पेंशन बहाली, न्यूनतम वेतन 72,000 करने और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की उठी मांग

 

वाराणसी, भदैनी मिरर: महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षाओं के खिलाफ कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की आवाज बुलंद करते हुए आज (18 जून 2026 को) 'भारतीय मजदूर संघ' (BMS) जिला कार्यसमिति वाराणसी ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रवाद और आपसी सहयोग के सिद्धांत पर काम करने वाले इस संगठन ने कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और रेहड़ी-पटरी दुकानदारों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी (डीएम) वाराणसी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक 22 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।

नोएडा जैसे गतिरोध से बचने के लिए समय पर कदम उठाए सरकार

प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के बाद 'भदैनी मिरर' से खास बातचीत में भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार सिंह ने कहा कि हाल ही में नोएडा में श्रमिकों और सरकार के बीच जो गतिरोध देखने को मिला, वैसी स्थिति भविष्य में दोबारा न आए, इसके लिए सरकार को समय रहते सचेत होना होगा।

राजीव कुमार सिंह ने आगे कहा, "हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर छोटे-बड़े बिंदु पर विचार करते हैं। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए यहां श्रमिकों के हितों की रक्षा होना और भी विशेष हो जाता है। डीएम साहब ने हमें आश्वस्त किया है कि जिला प्रशासन की तरफ से एक विशेष नोट बनाकर हमारी मांगों को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा।"

संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों के शोषण पर लगे रोक: विकास केसरी

संघ के जिला मंत्री विकास केसरी ने कहा कि आज मजदूर और कर्मचारी वर्ग बुरी तरह परेशान है। संविदा और आउटसोर्सिंग के नाम पर कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिलता और न ही उनके लिए कोई नियमावली बनाई गई है। नौकरी से निकाले जाने का डर हमेशा बना रहता है। आंगनबाड़ी और आशा बहनों के साथ भी पूर्ण रूप से अन्याय हो रहा है।

जिलाधिकारी ने दिया उचित कार्रवाई का आश्वासन BMS के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जिलाधिकारी वाराणसी ने आश्वस्त किया कि इस 22 सूत्रीय मांग पत्र को बिना किसी विलंब के सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (लखनऊ) प्रेषित कर दिया जाएगा और स्थानीय स्तर के मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा।

भारतीय मजदूर संघ की प्रमुख 22 सूत्रीय मांगें:

  1. वेतनमान में वृद्धि: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाए और न्यूनतम वेतनमान Rs 72,000/- किया जाए। साथ ही BSNL में 2017 से लंबित 7वां वेतनमान तुरंत लागू हो।

  2. पुरानी पेंशन (OPS): सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए।

  3. उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक: वर्ष 2023 की सांकेतिक हड़ताल में शामिल ऊर्जा विभाग के यूनियन पदाधिकारियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई समाप्त हो।

  4. सहकारी बैंक नियम संशोधन: जिला सहकारी बैंकों के वेतन पुनरीक्षण में बाधक बने सहकारिता के परिपत्र (सी-69) के वित्तीय मानकों को उत्तराखंड की तर्ज पर व्यावहारिक बनाया जाए।

  5. 5-डे बैंकिंग: बैंकों में 5 दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को शीघ्र लागू किया जाए।

  6. NHM कर्मियों को लाभ: एनएचएम के संविदा कर्मियों के लिए बीमा, स्थानांतरण नीति और वेतन विसंगति का समाधान हो और एएमएस व्यवस्था को हटाया जाए।

  7. नई भर्तियां: सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू हो।

  8. ई-रिक्शा और ऑटो चालक: ऑटो व ई-रिक्शा चालकों के लिए स्टैंड की व्यवस्था की जाए और पुलिसिया उत्पीड़न बंद हो।

  9. मजदूर का दर्जा: धोबी, दर्जी, बढ़ई, लुहार, मोची, कुम्हार और ऑटो चालकों को आधिकारिक रूप से 'मजदूर' की श्रेणी देकर सामाजिक सुरक्षा दी जाए।

  10. पटरी व्यवसायी: रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को वेंडिंग जोन बनाकर समुचित स्थान दिया जाए।

  11. परिवहन निगम: यूपी रोडवेज (परिवहन निगम) के संविदा कर्मियों को रिक्तियों के आधार पर नियमित किया जाए और मृतक आश्रित कोटे की बाध्यता खत्म हो।

  12. ग्रामीण मजदूर: कृषि, ग्रामीण और दिहाड़ी मजदूरों का न्यूनतम पारिश्रमिक तय कर सामाजिक सुरक्षा दी जाए।

  13. सफाई कर्मी: नगर निगमों में स्थायी सफाई कर्मियों की भर्ती हो और संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए।

  14. आउटसोर्सिंग नियमावली: आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का उत्पीड़न रोकने के लिए एक ठोस नियमावली बनाई जाए।

  15. मिड-डे मील: मिड-डे मील कर्मचारियों का मासिक मानदेय बढ़ाकर Rs 10,000/- किया जाए।

  16. आंगनबाड़ी: आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों/सहायिकाओं को नियमित कर न्यूनतम मानदेय Rs 18,000/- किया जाए।

  17. EPS-95 पेंशन: ईपीएस-95 के तहत मिलने वाली पेंशन में वृद्धि कर उसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाए।

  18. आशा कार्यकर्ता: आशा बहुओं को न्यूनतम Rs 18,000/- और आशा संगिनी को Rs 24,000/- का निश्चित मानदेय मिले।

  19. पत्रकार सुरक्षा: श्रमजीवी पत्रकारों को सुरक्षा बीमा और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए।

  20. श्रम विभाग कमेटियां: श्रम विभाग से जुड़े बोर्डों और परामर्शदात्री समितियों में श्रम संघों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

  21. एम्बुलेंस कर्मी: 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा के बर्खास्त कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए।

  22. चीनी मिल कर्मी: प्रदेश के चीनी मिलों और डिस्टीलरियों में कार्यरत कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण शासनादेश जल्द जारी हो।