Varanasi: गंगा में इफ्तार पार्टी में मांसाहार के अवशेष फेकने वाले आरोपियों की जमानत खारिज
नाव पर इफ्तार पार्टी और मांसाहार के आरोप का मामला, अदालत ने गंभीरता देखते हुए सभी आरोपियों को फिर भेजा जेल
वाराणसी। गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहार परोसने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार 14 आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सभी की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें पुनः जेल भेजने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा– रिहाई न्यायहित में नहीं
मामले की सुनवाई एडीजे (छठवें) आलोक कुमार की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपियों को जमानत देना न्यायहित में उचित नहीं है। इससे पहले भी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर चुकी थी।
सुनवाई के दौरान उठा वकालतनामे का विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान एक दिन पहले कोर्ट में उस समय हलचल मच गई थी, जब आरोपियों की ओर से पेश किए गए वकालतनामे को लेकर दूसरे पक्ष के अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई थी। अदालत ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए ऐसी प्रक्रियाओं से बचने की सख्त हिदायत दी थी।
अभियोजन पक्ष ने किया कड़ा विरोध
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है और इसकी गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को राहत नहीं दी जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
वादी रजत जायसवाल के अनुसार, गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें चिकन बिरयानी का सेवन किया गया और उसके अवशेष नदी में फेंके गए।
इस कृत्य को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला बताया गया है।
सोशल मीडिया वीडियो से हुई पहचान
पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की थी। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए गए, जिनमें इफ्तार पार्टी और मांसाहार सेवन की पुष्टि हुई है।
फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।