वाराणसी: सुबह-ए-बनारस के मंच पर अमेरिका से आईं कलाकारों ने कुचिपुड़ी नृत्य से बांधा समां
अस्सी घाट पर 'घाट संध्या' में शिव स्तुति पर दिखी भक्ति और लय की अद्भुत जुगलबंदी; काशी के प्रख्यात वैदिक विद्वान ने कलाकारों को किया सम्मानित।
वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): धर्म और संस्कृति की नगरी काशी के प्रसिद्ध अस्सी घाट स्थित 'सुबह-ए-बनारस' के मंच पर आयोजित 'घाट संध्या' में भारतीय शास्त्रीय कला का अद्भुत रंग देखने को मिला। अमेरिका से आईं भारतीय मूल की प्रतिष्ठित कलाकार डॉ. रम्या राव, रूपा राव एवं कन्ना राव ने अपनी मनमोहक कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शिव आराधना और भक्ति-लय का अद्भुत संगम
सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ 'प्रणवाकारम्' प्रस्तुति के साथ हुआ। इसके पश्चात कलाकारों ने देवाधिदेव महादेव को समर्पित विविध रचनाओं—'नमः शिवायते', 'शिवाष्टकम्', 'भज गोविन्दम्', 'नटेश कौतुवम्', 'शिव तांडव स्तोत्रम्' और 'मरकत तरंगम्' पर अपनी भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं से भक्ति और लय का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का भावुक समापन 'मदनगोपालते मंगलम्' की प्रस्तुति के साथ हुआ।
वैदिक परंपरा और भारतीय संस्कृति में विश्व को जोड़ने की क्षमता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी के प्रख्यात वैदिक विद्वान के. वेंकटरमण घनपाठी जी ने कलाकारों के प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "भारतीय संस्कृति और हमारी वैदिक परंपरा संपूर्ण विश्व को एकता के सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य रखती है। जब विदेशों में रहने वाले कलाकार भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य को अपनाकर उसकी साधना करते हैं, तो यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक विस्तार को दर्शाता है।"
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य महज मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह ईश्वर आराधना, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है और काशी ज्ञान, अध्यात्म तथा संस्कृति की विश्व राजधानी के रूप में स्थापित हो रही है।
काशी की पावन धरा पर प्रस्तुति देना अविस्मरणीय अनुभव
अमेरिका से आईं विदेशी कलाकारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी और मां गंगा के तट पर प्रस्तुति देना उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण और अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने बताया कि वे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से प्रेरित होकर निरंतर शास्त्रीय कलाओं का अभ्यास कर रही हैं और दुनिया भर में भारतीय संस्कृति के संदेश को फैला रही हैं।
समारोहपूर्वक किया गया सम्मान
समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा सभी प्रस्तुतिकर्ता कलाकारों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का कुशल और सफल मंच संचालन सीमा केसरी द्वारा किया गया।