वाराणसी: संस्कृत महाविद्यालय हड़पने की साजिश, करोड़ो की फर्जीवाड़े में आरोपी अनिल यादव की जमानत याचिका खारिज
फर्जी हलफनामे पर दिवंगत सदस्यों के नाम और जाली दस्तखत कर बनाई फर्जी समिति; ADJ-6 कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
वाराणसी, भदैनी मिरर। श्री रामानन्द पीठ संस्कृत महाविद्यालय, कर्णघण्टा की करोड़ों की संपत्ति और प्रबंध समिति को कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से हड़पने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मामले के मुख्य आरोपी अनिल कुमार यादव की पहली जमानत याचिका को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट सं०-06) आलोक कुमार की अदालत ने खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने माना गंभीर अपराध
सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष तिवारी के साथ अभियोजन के निजी अधिवक्ता शुभम सिंह, रणंजय प्रताप सिंह, गौरव कुमार सिंह, रमेश लाल श्रीवास्तव, जयप्रकाश श्रीवास्तव, संतोष सिंह एवं वीरेंद्र मिश्रा ने जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध किया।
न्यायालय ने अपराध की गंभीरता, फर्जी दस्तावेजों के निर्माण और विवेचना में आए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी अनिल कुमार यादव का प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करने का आदेश सुनाया।
बीमारी का फायदा उठाकर रचा गया था षड्यंत्र
दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, संस्था के वैध एवं निर्वाचित अध्यक्ष महंत ईश्वर दास (निवासी बद्रीकाश्रम, कर्णघण्टा) पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। आरोप है कि उनकी अस्वस्थता का नाजायज फायदा उठाते हुए आपराधिक सोच वाले तत्वों ने एक संगठित गिरोह बनाकर संस्था की समिति पर कब्जा करने की योजना बनाई।
आरोपियों ने अध्यक्ष महंत ईश्वर दास का एक जाली हलफनामा तैयार करवाया, जिस पर उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए। इस फर्जी दस्तावेज के जरिए वैध पदाधिकारियों को हटाकर आरोपियों ने खुद को नया अध्यक्ष, महामंत्री व अन्य पदाधिकारी घोषित कर दिया।
मृत व्यक्तियों को सूची में किया शामिल
धोखाधड़ी की हद तब पार हो गई जब आरोपियों ने वर्ष 2025-2026 की एक नई फर्जी सदस्य सूची तैयार की। इस सूची में नायक लेन चौखम्भा निवासी विजय शंकर उपाध्याय और काशीपुरा निवासी अशोक कुमार सिंह का नाम बतौर सदस्य शामिल किया गया, जबकि इन दोनों व्यक्तियों की मृत्यु पूर्व में ही हो चुकी है।
इसके बाद सहायक निबंधक (फर्म, सोसायटी एवं चिट्स, वाराणसी) के कार्यालय से बिना किसी भौतिक सत्यापन के पंजीकरण प्रपत्र जारी करवा लिया गया। इस फर्जी कार्यकारिणी की सूची को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में भी प्रेषित किया गया, ताकि विश्वविद्यालय से प्रशासनिक मान्यता हासिल की जा सके।
पुलिस जांच में खुला फर्जीवाड़े का राज
मामले की जांच (विवेचना) के दौरान पुलिस को मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो गया कि शपथपत्र पर महंत ईश्वर दास के हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी थे। साथ ही जिन सदस्यों की उपस्थिति में बैठक और चुनाव होना दिखाया गया था, उन सदस्यों ने पुलिस के सामने बयान दिया कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं थी और न ही वे इसमें शामिल हुए थे।
इन धाराओं में दर्ज है मामला
थाना चौक में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 336(3), 340(2), 351(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया है।
इन पर दर्ज है केस
पुलिस ने अनिल कुमार यादव (सोनातालाब, दीनदयालपुर, वाराणसी), अवध बिहारी दास (सुबाना, झज्जर, हरियाणा), नारायन सिंह (करिहरा, बलिया), कृष्ण कुमार पाण्डेय (पकहा, बलिया), संजीव कुमार त्रिपाठी (अशोक नगर कालोनी, वाराणसी), यशराज सिंह (करिहरा, बलिया) के खिलाफ केस दर्ज किया है।