Varanasi: काशी में भारत-जापान दोस्ती का नया स्वर्णिम अध्याय! सीएम योगी और आकिए आबे ने किया 'आबे मेमोरियल कॉरिडोर' का लोकार्पण
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में स्वर्गीय शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित गलियारे का उद्घाटन; भावुक हुईं पूर्व प्रथम महिला आकिए आबे, सीएम योगी बोले- 500 एकड़ में बन रही 'जापानी सिटी'।
भदैनी मिरर वाराणसी डेस्क: सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कूटनीतिक संबंधों की ऐतिहासिक गवाह बन चुकी मोक्षनगरी काशी (वाराणसी) में बुधवार को भारत और जापान के अटूट रिश्तों का एक नया एवं जीवंत अध्याय लिखा गया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में निर्मित 'आबे मेमोरियल कॉरिडोर' (स्मृति गलियारा) का भव्य उद्घाटन जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की धर्मपत्नी आकिए आबे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार के 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत बने इस मेमोरियल कॉरिडोर में दिसंबर 2015 की शिंजो आबे की ऐतिहासिक काशी यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके आत्मीय पलों की दुर्लभ तस्वीरों को करीने से संजोया गया है।
आकिए आबे हुईं भावुक: "पति जीवित होते तो आज खुद काशी खिंचे चले आते"
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जापान की पूर्व प्रथम महिला आकिए आबे अपने संबोधन के दौरान काफी भावुक हो गईं।
-
काशी यात्रा का सपना: उन्होंने कहा, "वर्ष 2015 में जब मेरे पति बनारस आए थे, तब उन्होंने मां गंगा की पावन आरती बड़े ध्यान और श्रद्धा से देखी थी। मेरी हमेशा से इच्छा थी कि मैं स्वयं काशी आऊं। आज इस कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ मेरी वह इच्छा पूरी हो गई।"
-
108 रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व: आकिए आबे ने बताया कि भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने ही इस केंद्र का नाम 'रुद्राक्ष' रखा था। इसकी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगाए गए हैं। जापान में भी 108 की संख्या उतनी ही पवित्र मानी जाती है, जहां नववर्ष पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटी बजाने की परंपरा है।
-
काशी-क्योटो पार्टनरशिप: उन्होंने साझा किया कि 2014 के काशी-क्योटो समझौते के तहत उनके विशेष आग्रह पर ही स्वर्गीय शिंजो आबे ने इस भव्य केंद्र के लिए अनुदान स्वीकृत किया था।
सीएम योगी ने तुलसीदास की चौपाई से समझाया सच्चे मित्र का अर्थ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन की शुरुआत जापानी भाषा में अतिथियों का स्वागत करते हुए की— "सेकाई पे मोतमो फुराई तोसी बनारसी योकोसो" (विश्व के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी में आप सभी का स्वागत है)।
-
सच्ची मित्रता की परिभाषा: सीएम योगी ने गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रसिद्ध चौपाई "निज दुख गिर सम रज करी जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥" का उद्धरण देते हुए कहा कि भारत और जापान के रिश्ते किसी स्वार्थ या नफा-नुकसान पर नहीं, बल्कि गहरे 'ट्रस्ट' और विश्वास पर टिके हैं।
-
25 वर्षों का सेवा संकल्प: सीएम ने कहा कि ठीक 25 वर्ष पहले, 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी जी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनके जनसेवा के 25 वर्षों के इस स्वर्णिम अवसर पर उनके प्रिय मित्र स्वर्गीय शिंजो आबे को समर्पित इस कॉरिडोर का उद्घाटन होना एक अद्भुत संयोग है।
500 एकड़ में बन रही 'जापानी सिटी', ग्रीन हाइड्रोजन में रचा जा रहा इतिहास
उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश और आर्थिक साझेदारी का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया:
-
जापानी सिटी का निर्माण: ग्रेटर नोएडा/ईटा क्षेत्र में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास 500 एकड़ में भव्य 'जापानी सिटी' विकसित की जा रही है।
-
यामानाशी डेस्क व ग्रीन हाइड्रोजन: यूपी के 'इन्वेस्ट यूपी' में एक समर्पित 'यामानाशी डेस्क' स्थापित की गई है। जापान का यामानाशी प्रांत अब उत्तर प्रदेश का प्रमुख 'ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर' है।
-
तकनीक व बाजार का संगम: जापान के पास उच्च तकनीक (Precision Technology) है और भारत के पास प्रतिभाशाली युवा ऊर्जा व विशाल बाजार। सेमीकंडक्टर, एआई, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में दोनों देश नया इतिहास रच रहे हैं।
सूर्यवंश और सूर्योदय की भूमि का अटूट मिलन
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष (अमृत पर्व) पूरे हो रहे हैं। जापान 'उगते सूरज की भूमि' (Land of the Rising Sun) है और उत्तर प्रदेश 'सूर्यवंश की भूमि' (Land of the Sun Dynasty) है, जहां भगवान श्री राम ने जन्म लिया। सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु और श्रावस्ती जैसे बुद्ध तीर्थों के कारण जापान की अगाध आस्था का मार्ग उत्तर प्रदेश से ही होकर गुजरता है।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, जापान से आया उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और काशी के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।