वाराणसी: मनीष सिंह हत्याकांड के गुनहगारों को पनाह देने वाले 4 और गिरफ्तार, पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन' जारी
मनीष सिंह मॉब लिंचिंग केस: हत्यारोपियों को छिपाने और संसाधन देने वालों पर पुलिस का कड़ा एक्शन।
वाराणसी। फूलपुर के घमहापुर गांव में सड़क दुर्घटना के बाद हुई मनीष सिंह की जघन्य हत्या (मॉब लिंचिंग) के मामले में पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी एक्शन मोड में है। गोमती जोन पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य अभियुक्तों को शरण देने, उन्हें छिपाने और कानून की नजरों से बचाने में मदद करने वाले 4 और अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बीती 26 अप्रैल को घमहापुर गांव में एक कार की टक्कर से महिला के घायल होने के बाद आक्रोशित भीड़ ने कार चालक मनीष सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस जघन्य अपराध को लेकर पुलिस उपायुक्त गोमती जोन नीतू कादयान और अपर पुलिस उपायुक्त नृपेन्द्र द्वारा पल-पल की मॉनिटरिंग की जा रही है।
पनाह देने वालों पर भी गिरेगी गाज
पुलिस ने पहले ही इस मामले में मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। हाल ही में 4 मई को 50-50 हजार के इनामी हत्यारोपियों आशीष राजभर और मनीष राजभर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि कुछ लोग इन इनामी अपराधियों को जानबूझकर छिपा रहे थे और उन्हें भागने के लिए संसाधन उपलब्ध करा रहे थे। इसी कड़ी में मंगलवार (05.05.2026) को फूलपुर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 4 मददगारों को दबोच लिया।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:
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शिवचन्द प्रसाद (45 वर्ष): निवासी कपिसा दानगंज, चोलापुर।
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मुकुन्द लाल (54 वर्ष): निवासी घमहापुर, फूलपुर (इनामी आरोपियों का पिता)।
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किसन (24 वर्ष): निवासी देवापुर, फूलपुर।
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गणेश कुमार (24 वर्ष): निवासी पुरारघुनाथपुर, बाबतपुर।
पुलिस टीम को मिली सफलता
गिरफ्तारी करने वाली टीम में फूलपुर थाने के उपनिरीक्षक जितेन्द्र कुमार वर्मा, उ0नि0 राजित राम यादव, आरक्षी अक्षय यादव और कांस्टेबल रूपचन्द्र सरोज शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि जघन्य अपराधियों की मदद करने वालों को भी अपराध में बराबर का भागीदार माना जाएगा और उनके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई जारी रहेगी।