वाराणसी: एपेक्स हॉस्पिटल में 2 दिवसीय 'लाइव स्पाइन सर्जरी कॉन्फ्रेंस' शुरू, पहले दिन विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक सर्जिकल अनुभव
वीओए (VOA) के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में 'प्लानिंग टू एक्जीक्यूशन' पर मंथन; लाइव ऑपरेशन और केस प्रेजेंटेशन के जरिए रीढ़ की जटिल बीमारियों के उपचार पर हुई चर्चा
वाराणसी। एपेक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं पीजीआई, वाराणसी में 'एपेक्स एकेडमिक एक्टिविटी' के अंतर्गत दो दिवसीय "लाइव स्पाइन सर्जरी कॉन्फ्रेंस" का सफल शुभारंभ हुआ। वाराणसी ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (VOA) के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता चेयरमैन प्रो. डॉ. एस. के. सिंह ने की।
सम्मेलन के पहले दिन रीढ़ की गंभीर बीमारियों के सटीक उपचार, सर्जिकल निर्णय लेने की प्रक्रिया और आधुनिक ऑपरेशन तकनीकों पर गहन वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। "प्लानिंग टू एक्जीक्यूशन" (Plan to Execution) विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने केस प्रस्तुतियों, पैनल चर्चाओं और लाइव सर्जरी के माध्यम से अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
लाइव सर्जरी सत्र और विशेषज्ञ संवाद
सम्मेलन के दौरान आयोजित लाइव स्पाइन सर्जरी सत्र में वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. स्वरूप पटेल, डॉ. अमन वर्मा एवं उनकी टीम ने ऑपरेशन से पूर्व संबंधित मरीज की स्थिति और सर्जिकल योजना पर विस्तार से चर्चा की।
लाइव सत्रों में प्रो. डॉ. पंकज कंडवाल, डॉ. विशाल कुंदनानी और डॉ. भास्कर सरकार ने मॉडरेटर की भूमिका निभाते हुए सर्जिकल निर्णयों और तकनीकी पहलुओं पर डॉक्टरों के बीच संवाद का कुशल मार्गदर्शन किया।
वैज्ञानिक सत्रों में इन प्रमुख विषयों पर हुआ मंथन:
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान देश भर से आए स्पाइन विशेषज्ञों ने रीढ़ की विभिन्न जटिलताओं और उनके समाधान पर अपने विचार रखे:
* संदिग्ध मेटास्टेसिस और फेल्ड बैक सर्जरी: डॉ. विशाल कुंदनानी ने रीढ़ में संदिग्ध मेटास्टेसिस के मूल्यांकन और पूर्व में हुई सर्जरी के बाद बनी रहने वाली समस्याओं (फेल्ड बैक सर्जरी सिंड्रोम) में दोबारा ऑपरेशन/हस्तक्षेप की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
* एंडोस्कोपिक तकनीक: प्रो. डॉ. अभिषेक कश्यप ने एंडोस्कोपिक तकनीक से कैल्सीफाइड डिस्क के आधुनिक प्रबंधन की जानकारी दी।
* डिस्क स्तर का चयन और संरचनात्मक सुधार: डॉ. अरुण कुमार विश्वनाधा ने ऑपरेशन के लिए सही डिस्क स्तर के चयन और वयस्कों में रीढ़ की विकृति (Spine Deformity) के उपचार में वास्तविक कार्यक्षमता के महत्व पर चर्चा की।
* अनावश्यक उपचार से बचाव: डॉ. एस. कुमार सिंह ने डिस्क प्रोलैप्स के मामलों में गैर-जरूरी उपचारों से बचने की सलाह दी।
* फ्यूजन और स्टेनोसिस: डॉ. अरविंद जी. कुलकर्णी ने लो-ग्रेड स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में फ्यूजन की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं, डॉ. के. श्रीकृष्ण चैतन्य ने लम्बर कैनाल स्टेनोसिस में डीकम्प्रेशन अथवा फ्यूजन फिक्सेशन के चयन और एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की उपयोगिता व सीमाओं को रेखांकित किया।
* ओपन स्पाइन सर्जरी: डॉ. वरुण खन्ना ने आधुनिक दौर में भी ओपन स्पाइन सर्जरी की प्रासंगिकता पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।
व्यावहारिक चर्चा और सत्र संचालन
सम्मेलन में डॉ. संदीप केशरवानी, डॉ. शशांक कृष्णन, डॉ. विनीत यादव, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. अक्षत चंद्रा एवं डॉ. अपूर्व अग्रवाल ने विभिन्न केस प्रेजेंटेशन के माध्यम से व्यावहारिक उपचार विकल्पों पर चर्चा को आगे बढ़ाया।
पूरे सत्र के सफल संचालन में डॉ. अभिनव अग्रवाल, डॉ. एस. कुमार सिंह, डॉ. अक्षत चंद्रा, डॉ. संदीप केशरवानी और डॉ. अपूर्व अग्रवाल की मुख्य भूमिका रही।
सम्मेलन के प्रथम दिन इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के अनुरूप ही सही उपचार का चयन होना चाहिए। सुविचारित सर्जिकल योजना और आधुनिक तकनीकों के सही उपयोग से रीढ़ के जटिल ऑपरेशनों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है।