UGC इक्विटी रेगुलेशन बिल 2026 के खिलाफ वाराणसी में जोरदार प्रदर्शन, रोल बैक करने की मांग
‘काला कानून’ बताते हुए नियम वापस लेने की मांग, प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने पर अड़े प्रदर्शनकारी
वाराणसी। UGC इक्विटी रेगुलेशन बिल 2026 के विरोध में मंगलवार को वाराणसी में जोरदार प्रदर्शन किया गया। जिला मुख्यालय के पास बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग जुटे और नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी UGC के संशोधित नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे थे।
दोपहर बाद प्रदर्शन कर रहे लोग DM पोर्टिको तक पहुंच गए, जहां उन्होंने धरना देकर जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक प्रशासन ज्ञापन लेने नहीं आता, तब तक वे मौके से नहीं हटेंगे।
“UGC का नया नियम समाज को बांटने वाला”
धरने का नेतृत्व कर रहे केसरिया भारत संस्था के अध्यक्ष कृष्णानंद पांडेय ने UGC इक्विटी रेगुलेशन बिल को “काला कानून” करार देते हुए कहा कि यह नियम समाज को खंडित करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून एकतरफा है और इससे सामाजिक समरसता को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने कहा, “देश में जो UGC का काला कानून लागू हुआ है, उसे तत्काल रोल बैक किया जाना चाहिए। यह कानून समाज को बांटने का काम करेगा। हमारे महापुरुषों ने जिस समाज को हजारों वर्षों से संजोया है, यह नियम उसे कमजोर करेगा।”
प्रशासन पर भी लगाए गंभीर आरोप
कृष्णानंद पांडेय ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी पिछले चार घंटे से धरने पर बैठे हैं, लेकिन कोई अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं आया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के नाम पत्रक लेकर जिलाधिकारी को सौंपने आए हैं और जब तक ज्ञापन नहीं लिया जाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा।
“सवर्ण समाज के लिए अहितकारी है नियम”
कलेक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठीं रंजन सिंह ने UGC के संशोधित नियमों को सवर्ण समाज के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग होने की पूरी संभावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सवर्ण छात्रों और शिक्षकों को असुरक्षित बनाता है और कैंपस के माहौल को बिगाड़ सकता है।
रंजन सिंह ने प्रतीकात्मक विरोध करते हुए कहा कि वह चूड़ियां लेकर आई हैं, जो उन सवर्ण और ब्राह्मण नेताओं व अधिकारियों के लिए हैं, जो इस कानून के खिलाफ खुलकर आवाज नहीं उठा रहे। उन्होंने बताया कि सभी प्रदर्शनकारी मिलकर ये चूड़ियां प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भेजेंगे।
ज्ञापन में क्या कहा गया
प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे जाने वाले ज्ञापन में कहा गया है कि UGC इक्विटी रेगुलेशन बिल 2026 के प्रावधान पूरी तरह एकपक्षीय हैं। इसमें सामान्य वर्ग को दोषी मानने की मानसिकता झलकती है, जिससे सामाजिक एकता और उच्च शिक्षा के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 में पहले से ही भेदभाव से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं, ऐसे में अलग से समता समिति बनाने की आवश्यकता नहीं है। समता समिति में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व न होना और झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान न होना, एकतरफा कार्रवाई को बढ़ावा देगा।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि UGC इक्विटी रेगुलेशन बिल 2026 को तत्काल वापस लिया जाए, ताकि शिक्षा संस्थानों में समानता, विश्वास और निष्पक्षता बनी रहे।