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APK फाइल भेजकर बैंक खातों से लाखों रूपये उड़ाने वाले  गिरोह के सरगना समेत दो शातिर पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार

मूल रूप से झारखंड के रहनेवाले हैं नागेश्वर और अक्षय मंडल, पश्चिम बंगाल को बना लिया था गिरोह ने ठिकाना

 

रामनगर के व्यक्ति के खाते से 8.38 लाख उड़ाने के बाद चढ़ गये वाराणसी साइबर क्राइम थाना पुलिस के हत्थे

वाराणसी, भदैनी मिरर। साइबर क्राइम पुलिस ने ट्रोजन व एसएमएस फॉरवर्डर आधारित एपीके फाइल भेजकर बैंक खातों से लाखों रूपये उड़ाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गैंग के सरगना समेत दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरोह कई लोगों को अपने जाल में फंसा कर लाखों रूपये उड़ा चुका है। पुलिस टीम ने इन्हें पश्चिम बंगाल के अंडाल रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। इन शातिरों के पास से 06 आईफोन, 09 एंड्रायड मोबाइल फोन और 1,52,100 रुपये बरामद हुए है। पकड़े गये इन अपराधियों में 30 वर्षीय नागेश्वर मंडल पश्चिम बंगाल के पश्चिमी वर्धमान जिले के अंडाल थाना क्षेत्र के भादुर गांव का है। जबकि यह झारखंड के जामताड़ा जिले के नरायनपुर थाना क्षेत्र के मोहनपुर का मूल निवासी है। इसी तरह दूसरा 24 वर्षीय अपराधी अक्षय मंडल उर्फ पिंटू भी पश्चिम बंगाल के भादुर में ही रहकर जालसाजी करता रहा और यह भी झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड थाना क्षेत्र के सियाताड़ का मूल निवासी है। नागेश्वर गैंग का सरगना है।

पुलिस ने बताया कि 5 जनवरी 2026 को रामनगर थाना क्षेत्र के मछरहट्टा निवासी अनूप गुप्ता ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई। बताया कि साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते को हैक कर 8,38,402 रुपये उड़ा दिये हैं। साइबर क्राइम थाने में धारा 318(4) बीएनएस व 66डी आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए धारा 61(2), 317(2), 338, 336(3) और 340(2) की बढ़ोत्तरी कर दी गइ। प्रभारी निरीक्षक उदयबीर सिंह के नेतृत्व में टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर पश्चिम बंगाल के अंडाल रेलवे स्टेशन से दोनों शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरोह में अभी कई और लोग शामिल हैं। पुलिस उनकी भी तलाश कर रही है।

पुलिस ने बताया कि गिरोह के लोग पहले बैंक और आरटीओ चालान भुगतान से संबंधित फर्जी डिजिटल फ्लायर बनाकर लोगों को एक कूटरचित एपीके फाइल के साथ भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस एप्लीकेशन को मोबाइल में इंस्टॉल करता था। उसका मोबाइल एक्सेस और आने वाले सभी एसएमएस ठगों के पास पहुंच जाते थे। इसके बाद गिरोह एसएमएस बॉम्बर के जरिए सैकड़ों टारगेटेड यूजर को मैसेज भेजकर भ्रम की स्थिति पैदा करते थे। इसी दौरान वे पीड़ित के बैंक खाते से ट्रांजेक्शन कर पैसे निकाल लेते थे। ठगी की रकम टेलीग्राम बॉट के माध्यम से म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी और फिर कार्डलेस पेमेंट के जरिए नकद निकाल लिया जाता था। नागेश्वर मंडल पुराना जालसाज है। इसके खिलाफ झारखंड के जामताड़ा साइबर क्राइम थाना धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत पहले से मुकदमे दर्ज हैं। झारखंड पुलिस इस पर नजर रखने लगी तो इसने गिरोह के साथ पश्चिम बंगाल को अपना ठिकाना बना लिया।