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'दमन जितना बढ़ेगा, प्रतिरोध उतना तेज होगा': शास्त्री घाट पर जुटे छात्र कार्यकर्ताओं की केंद्र को ललकार

वाराणसी के शास्त्री घाट पर गूंजा छात्र हुंकार: दमन, गिरफ्तारी और पेपर लीक के खिलाफ दिशा छात्र संगठन का बड़ा प्रदर्शन

 

वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): वाराणसी के वरुणा तट स्थित शास्त्री घाट पर रविवार को दिशा छात्र संगठन के बैनर तले छात्र-छात्राओं और नौजवानों ने केंद्र सरकार की नीतियों और छात्र दमन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हालिया देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बाद कार्यकर्ताओं पर हो रही गिरफ्तारियों, मुकदमों और एफआईआर (FIR) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

"केवल इस्तीफे से नहीं, NTA और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ है यह लड़ाई"

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दिशा छात्र संगठन के प्रतिनिधि ध्रुव ने सरकार की दमनकारी नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि देशव्यापी ऐतिहासिक छात्र आंदोलन से घबराकर सरकार दमन का रास्ता अपना रही है।

ध्रुव ने कहा, "यह लड़ाई सिर्फ किसी एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है। हमारी लड़ाई NTA के कुप्रबंधन, नीट (NEET) और हाल ही में झारखंड में हुए पेपर लीक के खिलाफ है। सरकार डरी हुई है कि कहीं फिर से बड़ा छात्र आंदोलन न खड़ा हो जाए, इसलिए एक्टिविस्टों और आम छात्रों पर चुन-चुनकर एफआईआर दर्ज की जा रही है और उन्हें जेलों में डाला जा रहा है।"

'वादों से मुकरी सरकार, न्यायिक और नैतिक कसौटी पर उठे सवाल'

संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र में बैठे जिम्मेदार प्रतिनिधियों ने पूर्व में किसी भी छात्र पर एफआईआर या दंडात्मक कार्रवाई न करने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में सरकार अपने वादे से मुकर गई।

शास्त्री घाट पर वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब आम नागरिक, अभिभावक और छात्र अपने जायज अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे थे, तब उन पर मुकदमों और आपराधिक मामलों का ठप्पा लगाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दमन चक्र चलाकर छात्र चेतना को दबाया नहीं जा सकता, बल्कि इससे संघर्ष और तेज होगा।

नई शिक्षा नीति और फंड कटौती के खिलाफ व्यापक आंदोलन का आह्वान

प्रदर्शन के अंत में दिशा छात्र संगठन ने छात्र समुदाय से शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ गोलबंद होने की अपील की। संगठन की मुख्य मांगें:

  1. NTA प्रणाली की समीक्षा व सुधार: लगातार हो रहे पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की धांधली पर पूर्ण विराम लगे।

  2. छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द हों: आंदोलनरत छात्रों व छात्र एक्टिविस्टों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।

  3. शिक्षा के निजीकरण पर रोक: विश्वविद्यालयों में बजट कटौती, लोन व्यवस्था और नई शिक्षा नीति (NEP) के जनविरोधी प्रावधानों को रद्द किया जाए।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों का उत्पीड़न और परीक्षाओं में धांधली बंद नहीं हुई, तो शास्त्री घाट से उठी यह आवाज देशव्यापी जनआंदोलन का रूप लेगी।