BHU में मरीजों के हक की लड़ाई: दलालों के सिंडिकेट और अव्यवस्थाओं के खिलाफ छात्रों का मोर्चा; IMS निदेशक को सौंपा ज्ञापन
कार्डियोलॉजी OPD की अव्यवस्था, दलाली और प्राइवेट प्रैक्टिस के खिलाफ छात्र नेताओं का हल्ला बोल, दी आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी (भदैनी मिरर)। पूर्वांचल के एम्स कहे जाने वाले बीएचयू (BHU) स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय में लगातार गहराती अव्यवस्थाओं, बाहरी दलालों के बढ़ते प्रभाव और मरीजों की परेशानियों को लेकर छात्र समुदाय ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बुधवार को छात्र नेता आशुतोष सिंह “यीशु” के नेतृत्व में एक छात्र प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS-BHU) के निदेशक और सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (MS) से मुलाकात कर 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
छात्रों ने अस्पताल प्रशासन को आगाह किया कि दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अस्पताल परिसर से दलालों का नेटवर्क खत्म करने की मांग
ज्ञापन में प्रमुखता से आरोप लगाया गया कि अस्पताल के ओपीडी, इमरजेंसी और मुख्य द्वारों पर बाहरी दलाल सक्रिय हैं, जो मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों में भेजते हैं। छात्रों ने मांग की कि दलालों और अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर तत्काल रोक लगाई जाए और पुलिस प्रशासन के सहयोग से नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाए।
कार्डियोलॉजी OPD और प्राइवेट प्रैक्टिस पर उठाए सवाल
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी समय से संचालित नहीं हो रही है। कई डॉक्टर शाम 4 बजे तक ओपीडी में पहुंचते हैं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। साथ ही, बीएचयू ओपीडी में मरीजों को देखने के बाद उन्हें निजी अस्पतालों या क्लीनिकों में इलाज और ऑपरेशन के लिए ले जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।
छात्रों की प्रमुख मांगें:
- दलाली पर लगे रोक: इमरजेंसी और ओपीडी से बाहरी दलालों का सफाया हो।
- कर्मचारियों का रोटेशन: एक ही जगह वर्षों से जमे ओपीडी स्टाफ और नर्सों का प्रशासनिक रोटेशन किया जाए।
- रेफरल/ट्रियाज सिस्टम: जनरल मेडिसिन (कमरा नंबर 216) के नाम पर मरीजों को बेवजह दौड़ाना बंद हो और डायरेक्ट रेफरल/ट्रियाज प्रणाली लागू हो।
- आयुष्मान काउंटर बढ़ें: आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले मरीजों की भीड़ को देखते हुए काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
- समय पर चलें ओपीडी: कार्डियोलॉजी समेत सभी ओपीडी में डॉक्टरों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
- निजी प्रैक्टिस की जांच: बीएचयू से मरीजों को प्राइवेट क्लिनिक भेजने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हो।
- व्हीलचेयर की उपलब्धता: दिव्यांग, बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर और उनके रखरखाव का पुख्ता इंतजाम हो।
- हेल्पडेस्क और शिकायत निवारण: मरीजों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पारदर्शी हेल्पडेस्क और शिकायत प्रणाली बनाई जाए।
"व्यवस्था में सुधार ही मुख्य उद्देश्य"
वार्ता के दौरान छात्र नेता आशुतोष सिंह “यीशु” ने स्पष्ट किया, "हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय के अस्पताल की साख को बचाना और मरीजों को सम्मानजनक इलाज दिलाना है। अगर अस्पताल प्रशासन ने इन मांगों पर जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो छात्र समाज मरीजों के हित में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।"
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में धीरज, राजू, शुभम, केतन, आदित्य, हिमांशु, और राकेश सहित कई प्रमुख छात्र प्रतिनिधि मौजूद रहे। अस्पताल प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि उठाए गए बिंदुओं पर समीक्षा कर जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।