BHU ट्रॉमा सेंटर में 'कमाई' का खेल? बाहरी MR के सिंडिकेट पर भड़के छात्र
निदेशक को पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग, कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन का ऐलान।
वाराणसी (भदैनी मिरर): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ और दवा कंपनियों के अवैध सिंडिकेट के संचालन का एक गंभीर मामला सामने आया है। बीएचयू के छात्रों ने चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के निदेशक को पत्र सौंपकर अस्पताल परिसर में सक्रिय बाहरी दवा प्रतिनिधियों (MR) और उनके कथित मददगारों के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
प्रभारी के नाम पर रौब झाड़ने का आरोप, मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक
निदेशक को सौंपे गए पत्र में छात्रों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि "संजीव सिंह" नामक एक बाहरी व्यक्ति, जो हड्डी (ऑर्थोपेडिक) और अन्य महंगी दवाओं की कंपनियों से जुड़ा है, ट्रॉमा सेंटर में अवैध रूप से अपना व्यापार चला रहा है।
शिकायत पत्र के अनुसार, उक्त व्यक्ति खुद को ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह का रिश्तेदार बताता है और परिसर में अपना रसूख दिखाता है। छात्रों ने आरोप लगाया कि उसे कथित तौर पर आंतरिक संरक्षण प्राप्त है, जिससे उसकी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। छात्रों ने जांच की पारदर्शिता के लिए बकायदा संजीव सिंह का मोबाइल नंबर (7705808011) भी प्रशासन को उपलब्ध कराया है।
नेफ्रोलॉजी से लेकर कार्डियोलॉजी तक फैला है जाल!
अस्पताल परिसर में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (MR) का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पत्र में दावा किया गया है कि:
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नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, सर्जरी और कार्डियोलॉजी जैसे संवेदनशील विभागों की ओपीडी में दिनभर बाहरी लड़के सक्रिय रहते हैं।
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उपेंद्र, रोहित, आशीष और अमन नामक युवक प्रतिदिन अस्पताल कर्मचारियों की तरह ओपीडी में जमे रहते हैं।
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ये लोग सीधे तौर पर मरीजों और चिकित्सकीय व्यवस्था को प्रभावित कर निजी कंपनियों की महंगी दवाएं लिखने का दबाव या प्रचार-प्रसार करते हैं।
छात्रों ने निदेशक के सामने रखी ये 5 प्रमुख मांगें:
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उच्चस्तरीय जांच: संजीव सिंह और ट्रॉमा सेंटर में सक्रिय बाहरी दवा कंपनियों के नेटवर्क की तत्काल जांच हो।
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भूमिका की जांच: ट्रॉमा सेंटर प्रभारी पर लगे संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए।
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प्रवेश पर रोक: अस्पताल परिसर में अवैध रूप से घूम रहे अवांछित और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर तत्काल प्रतिबंध लगे।
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सुरक्षा पुख्ता हो: सभी विभागों की ओपीडी में सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
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पारदर्शिता: मरीजों के इलाज में पूरी पारदर्शिता बरती जाए ताकि आर्थिक शोषण रुक सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन को अल्टीमेटम:
छात्रों का कहना है कि सर सुंदरलाल अस्पताल पूर्वांचल और आसपास के राज्यों के गरीब मरीजों की लाइफलाइन है। यहां चल रहा यह खेल संस्थान की गरिमा पर दाग लगा रहा है। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में शीघ्र और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो छात्रहित और अस्पताल की पारदर्शिता बहाल करने के लिए छात्र बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बीएचयू प्रशासन की होगी।