वाराणसी में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट जागरूकता कार्यक्रम: पूर्वांचल के वस्त्र उद्योग को मिलेगा वैश्विक मंच
वस्त्र मंत्रालय के TEFC द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलीं टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा मनोहर देसाई— अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाकर सरकारी योजनाओं का उठाएं फायदा।
भदैनी मिरर (डिजिटल डेस्क), वाराणसी: बनारस और पूरे पूर्वांचल के समृद्ध वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल सेक्टर) को अंतरराष्ट्रीय पहचान और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधीन वस्त्र समिति द्वारा संचालित 'टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर' (TEFC) ने वाराणसी के एक स्थानीय होटल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "बिल्डिंग ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस: इंडिया-ईयू के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन फॉर टेक्सटाइल सेक्टर" रहा। इसका सीधा मकसद स्थानीय बुनकरों, वस्त्र निर्माताओं और निर्यातकों को यूरोपीय संघ (EU) समेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिलने वाले नए अवसरों से अवगत कराना था।
वैश्विक जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालें बुनकर और निर्यातक
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं वस्त्र मंत्रालय की टेक्सटाइल कमिश्नर सुश्री वृंदा मनोहर देसाई ने दीप प्रज्वलित कर सत्र की शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि पूर्वांचल का वस्त्र उद्योग तब तक नई ऊंचाइयों को नहीं छू सकता, जब तक वह अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रतिस्पर्धात्मकता को नहीं अपनाता। उन्होंने हितधारकों से अपील की कि वे वैश्विक बाजार की तेजी से बदलती जरूरतों के अनुसार अपने उत्पादों को ढालें और सरकार द्वारा चलाई जा रही निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का भरपूर लाभ उठाएं।
एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर देगा हर कदम पर मार्गदर्शन
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद वस्त्र समिति के सचिव कार्तिकेय ढांडा ने कहा कि TEFC का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निर्यातकों को हर प्रशासनिक व रणनीतिक स्तर पर हैंड-होल्डिंग सपोर्ट देना है, ताकि बनारसी और पूर्वांचली वस्त्रों को दुनिया के कोने-कोने में पहचान मिल सके।
विशेषज्ञों ने समझाए नियम और वित्तीय रास्ते
सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने निर्यात की बारीकियों पर प्रकाश डाला:
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नियम व टैरिफ में छूट: वस्त्र समिति के सहायक निदेशक अम्बरीश सिंह ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत मिलने वाले टैरिफ लाभ, रूल्स ऑफ ओरिजिन और जरूरी कागजी प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझाया।
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वित्तीय सहायता: एग्जिम बैंक (लखनऊ) के रीजनल हेड आशीष सोनी ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के जरिए एमएसएमई (MSME) और निर्यातकों को मिलने वाले वित्तीय-रणनीतिक सपोर्ट की जानकारी दी।
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DGFT की प्रस्तुति: डीजीएफटी के अधिकारियों ने निर्यात नीतियों और नई दिशाओं पर प्रेजेंटेशन दी।
कार्यक्रम में संयुक्त डीजीएफटी (वाराणसी) आलोक द्विवेदी, कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) के वाइस चेयरमैन असलम महबूब और पूर्वी उत्तर प्रदेश निर्यातक संघ (EUPEA) के कोषाध्यक्ष राजेश कुशवाहा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंतिम चरण में आयोजित ओपन क्यू-एंड-ए (Q&A) सेशन में स्थानीय निर्यातकों ने एचएस कोड वर्गीकरण और नियामक अनुपालनों से जुड़े अपने संशयों को विशेषज्ञों के सामने रखा और उनका समाधान पाया।