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सुबह-ए-बनारस आनंद कानन में काव्यार्चन, युवा और वरिष्ठ रचनाधर्मियों का भावपूर्ण संगम

49वीं कड़ी में प्रभु श्रीराम और राधा–कृष्ण पर केंद्रित रचनाओं से सजा काव्य सत्र, संचालन में शांभवी टंडन ने छोड़ी विशेष छाप 

 
वाराणसी, भदैनी मिरर। 
सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की 49वीं कड़ी में काव्य और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। इस काव्यार्चन सत्र में नगर के वरिष्ठ रचनाधर्मियों के साथ-साथ युवा प्रतिभाओं ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इस सत्र की विशेषता इसका सधा हुआ और प्रभावशाली संचालन रहा। काशी की उदीयमान रचनाकार शांभवी टंडन ने न केवल मंच संचालन में परिपक्वता का परिचय दिया, बल्कि श्रीराधा–कृष्ण पर केंद्रित अपने काव्यपाठ से भी श्रोताओं की भरपूर सराहना बटोरी। उनकी रचना- “बांसुरी की तान सुन, मधुर सा तान सुन,
छलिया पर चित गित वार गई राधिका…” ने पूरे वातावरण को भक्ति और श्रृंगार रस से सराबोर कर दिया।
नगर की वरिष्ठ रचनाकार प्रियंका अग्निहोत्री ‘गीत’ की अध्यक्षता में आयोजित इस काव्य सत्र की शुरुआत वरिष्ठ शायरा छाया शुक्ला ने की। उन्होंने प्रभु श्रीराम को समर्पित रचना- “तुम चेतना हो राम मेरे, धर्म के तुम बोध हो…” सुनाकर श्रोताओं से विशेष प्रशंसा प्राप्त की।
इसके पश्चात अहमदाबाद से आमंत्रित अतिथि रचनाकार सौरभ शुक्ल ने श्रीराम की सर्वव्यापकता को नमन करते हुए अपनी रचना- “कण-कण में तुम ही बसे हो अगर तो…”
का पाठ किया। इसके अलावा उन्होंने मन और श्रृंगार रस से जुड़ी रचनाएं भी प्रस्तुत कीं।
सत्र के अंतिम चरण में प्रियंका अग्निहोत्री ‘गीत’ ने अपने मुक्तकों और गीतों के माध्यम से माहौल में भावनात्मक खुमारी घोल दी। उनका मुक्तक- “परदेस में बैठी मां मेरी नजर उतारी है…”
और गीत- “हम दीवानों की बातें न पूछो…” श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित करने में सफल रहा।
डॉ. अरविन्द मिश्र ‘हर्ष’ के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत में रचनाकारों का स्वागत ऋतु दीक्षित ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन का दायित्व संतोष प्रीत ने निभाया। रचनाकारों को प्रमाण पत्र पं. अरुण द्विवेदी, प्रियंका सिंह और जया टंडन द्वारा प्रदान किए गए।
इस अवसर पर सीए आशीष उपाध्याय, डॉ. जयप्रकाश मिश्र, नवगीतकार शिवानंद ‘सहयोगी’, गिरीश पांडेय ‘काशिकेय’, निकेता सिंह, डॉ. महेंद्र तिवारी ‘अलंकार’, डॉ. नागेश शांडिल्य, एड. रुदनाथ त्रिपाठी ‘पुंज’, राजलक्ष्मी मिश्रा, जगदीश्वरी चौबे, गौतम अरोड़ा ‘सरस’ सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।