सोनभद्र प्रदूषण पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा: NGT ने गठित की हाईपावर कमेटी, गांव-गांव शिविर लगाकर तय होगी क्षतिपूर्ति
एनजीटी का बड़ा आदेश; एम्स भोपाल, नीरी और सीपीसीबी के विशेषज्ञ घर-घर जाकर लेंगे दावे, प्रभावितों के इलाज के लिए बनेगा मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल।
सोनभद्र/वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क):वर्षों से वायु, जल और मृदा प्रदूषण की मार झेल रहे सोनभद्र जिले के लाखों निवासियों के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की प्रधान पीठ ने सोनभद्र में प्रदूषण से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य नुकसान के लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (मुआवजा) तय करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
एनजीटी के इस आदेश के तहत एक उच्चस्तरीय (हाईपावर) कमेटी का गठन किया गया है, जो सीधे धरातल पर उतरकर पीड़ितों के स्वास्थ्य का आकलन करेगी और मुआवजा तय करेगी।
हाईपावर कमेटी में देश के नामचीन संस्थान शामिल
एनजीटी के निर्देशानुसार केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) को इस पूरे अभियान की नोडल एजेंसी बनाया गया है। इस हाईपावर कमेटी में देश के शीर्ष विशेषज्ञ संस्थानों को शामिल किया गया है, जिनमें:
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)
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राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI)
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एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal)
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राष्ट्रीय व्यावसायिक स्वास्थ्य संस्थान (NIOH)
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS)
कमेटी की उप-समिति सोनभद्र के प्रभावित गांवों में विशेष शिविर लगाएगी। ग्रामीण अपने स्वास्थ्य नुकसान और बीमारी से जुड़े दावे व दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत कर सकेंगे। यदि कोई ग्रामीण निर्धारित प्रारूप में दावा नहीं दे पाता, तो भी उसका आवेदन केवल इस तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा।
लगभग 10 लाख की आबादी प्रभावित, 276 गांवों में स्थिति गंभीर
विभिन्न जांच रिपोर्टों और वर्ष 2014-15 की कोर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, सोनभद्र और उससे सटे सिंगरौली क्षेत्र की करीब 10 लाख आबादी प्रदूषण से प्रभावित है। विशेषकर कोन, बभनी, म्योरपुर और दुद्धी ब्लॉक के 276 गांवों की 2 लाख से अधिक आबादी पानी में फ्लोराइड और भारी धातुओं (Heavy Metals) के जहर के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट झेल रही है।
निर्मित होगा मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, सरकार की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि आयुष्मान कार्ड और सरकारी अस्पतालों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं, इसलिए मुआवजे की जरूरत नहीं है। एनजीटी की पीठ ने सरकार के इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि यह पीड़ित आबादी को मुआवजा देने से इंकार करने जैसा है।
एनजीटी ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों की सुलभ पहुँच वाले स्थान पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से युक्त एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल अविलंब स्थापित किया जाए।
15 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
यह याचिका सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी द्वारा वर्ष 2024 में दाखिल की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी, जहां कमेटी अपनी गांववार प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी इं. आरके सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलते ही उप-समिति का गठन और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।