नीट पेपर लीक और शिक्षा माफियाओं के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ताओं का अनशन। जंतर-मंतर पर बैठे छात्रों और सोनम वांगचुक का किया समर्थन
प्रधानमंत्री को भेजा 7 सूत्रीय ज्ञापन।शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
वाराणसी: देश में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों और शिक्षा व्यवस्था के संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। लोक समिति और साझा संस्कृति मंच के बैनर तले एक दिवसीय उपवास और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारी सुबह 10:00 बजे से अनशन पर बैठकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे।
युवाओं की पीड़ा और सरकार को चुनावी चेतावनी
लोक समिति से जुड़ीं सामाजिक कार्यकर्ता आशा राय ने कहा कि देश का युवा पीड़ित है और इस पीड़ा के समय में भी सरकार के पास उनसे बात करने का समय नहीं है, जो कि अत्यंत निंदनीय है। वहीं, लोक समिति के संयोजक और साझा संस्कृति मंच से जुड़े नंदलाल मास्टर ने बताया कि सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे छात्र साथियों के समर्थन में 50 से ज्यादा सत्याग्रही उपवास पर बैठे। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
नंदलाल मास्टर ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा सफेद कपड़ों में छात्रों को ले जाकर गिरफ्तार करना और अस्पताल में भर्ती कराना अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आम जनता की मांग को नहीं मानती है, तो 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव और 2029 के केंद्र सरकार के चुनाव में जनता इसका माकूल जवाब देगी।
शिक्षा माफियाओं का राज और 1857 जैसी क्रांति की चेतावनी
प्रदर्शन में शामिल समाज सेवक देवेंद्र कुमार प्रजापति ने कहा कि 2022 में 17 पेपर लीक हुए थे और 2026 में भी पेपर लीक का सिलसिला जारी है, जिसका मुख्य कारण शिक्षा माफिया हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार केवल अपने मन की बात करती है और 140 करोड़ जनता की बात नहीं सुनी जा रही है। देवेंद्र कुमार ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया, तो 1857 जैसी बड़ी क्रांति होगी और देश का कोई भी चौराहा या गली ऐसी नहीं बचेगी जहां धरना प्रदर्शन न हो।
प्रधानमंत्री को भेजा गया 7 सूत्रीय ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों की ओर से प्रधानमंत्री महोदय को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया गया है, जिसमें बताया गया है कि वर्षों की कठिन मेहनत के बाद भी छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। ज्ञापन में तत्काल कार्रवाई के लिए निम्नलिखित 7 प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
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NEET पेपर लीक और दर्जनों अन्य परीक्षाओं के सुसाइड पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें।
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सभी पेपर लीक एवं परीक्षा घोटालों की सर्वोच्च स्तर पर निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
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पेपर लीक मामलों में दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए तथा शिक्षा के निजीकरण पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
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देश के प्रत्येक छात्र को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण, समान एवं वैज्ञानिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
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वैज्ञानिक समाजसेवी सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा मनिष और अमीन के अनशन को देखते हुए बातचीत की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और अनशन को सद्भावपूर्वक सहमति से खत्म कराया जाए।
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सरकार श्वेत पत्र लेकर आए और संसद के मानसून सत्र में शिक्षा के मुद्दे पर खुली चर्चा करवाए।