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महीनों तक छकाया, डरावनी आवाजों से डराया; जानिए वाराणसी की डाबर कंपनी से कैसे पकड़ा गया शातिर 'मुर्दाखोर'

वाराणसी: डाबर कंपनी परिसर में 'मुर्दाखोर' बिलाव का सफल रेस्क्यू, वन विभाग और सर्प मित्र ने जाल बिछाकर पकड़ा

 
वाराणसी। मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के रूपापुर स्थित डाबर कंपनी परिसर में पिछले कई महीनों से दहशत का सबब बना एक दुर्लभ और खतरनाक वन्यजीव आखिरकार रविवार को पकड़ में आ गया। वन विभाग की टीम और स्थानीय सर्प मित्र ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद इस जानवर का सुरक्षित रेस्क्यू किया। पकड़े गए इस जीव को 'कस्तूरी बिलाव' (Civet Cat) के नाम से जाना जाता है, जिसे ग्रामीण इलाकों में आम बोलचाल की भाषा में 'मुर्दाखोर' भी कहते हैं।
डाबर कंपनी के कर्मचारियों के मुताबिक, यह जानवर पिछले कई महीनों से कंपनी परिसर के भीतर छिपकर रह रहा था। वह अक्सर रात के अंधेरे में निकलता और कंपनी की कई कीमती सामग्रियों को नुकसान पहुंचा रहा था। उसकी अजीबोगरीब और डरावनी आवाज से कर्मचारियों में भी भारी दहशत का माहौल था। कई दिनों तक कर्मचारियों को समझ नहीं आया कि यह कौन सा जीव है। आखिरकार, जब एक कर्मचारी ने चालाकी दिखाते हुए उसकी फोटो खींचकर वन विभाग को भेजी, तब जाकर खुलासा हुआ कि यह कोई साधारण जंगली बिल्ली नहीं, बल्कि 'कस्तूरी बिलाव' है।
वन विभाग को जैसे ही इसके बारे में पता चला, टीम इसे पकड़ने के प्रयासों में जुट गई थी। स्थानीय सर्प मित्र रतन गुप्ता की मदद से पिछले कई महीनों में रेस्क्यू के कई प्रयास किए गए, लेकिन यह शातिर जानवर हर बार चकमा देकर भागने में सफल हो जाता था। रविवार दोपहर को जब यह जानवर दोबारा कंपनी परिसर में दिखाई दिया, तो कर्मचारियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी।
रेस्क्यू ऑपरेशन: घंटों चली आंख-मिचौली
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत एक्शन में आई। टीम का नेतृत्व कर रहे डिप्टी रेंजर संतोष कुमार और वनरक्षक संजय कुमार स्थानीय सर्प मित्र रतन गुप्ता को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। जानवर को एक सुरक्षित कोने में घेरने के लिए जाल बिछाया गया। कस्तूरी बिलाव बेहद फुर्तीला और आक्रामक था, जिससे उसे पकड़ने में टीम को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घंटों की कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के बाद, सर्प मित्र रतन गुप्ता और वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित रूप से काबू कर पिंजरे में कैद कर लिया।
सर्प मित्र रतन गुप्ता की जांबाजी की चर्चा
रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल होने के बाद मौके पर मौजूद लोगों और डाबर कंपनी के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस बेहद फुर्तीले और खतरनाक माने जाने वाले जानवर को पकड़ने में सर्प मित्र रतन गुप्ता ने जिस हिम्मत और सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी पूरे इलाके में जमकर सराहना हो रही है। वन विभाग की टीम अब इस जानवर को उसके प्राकृतिक आवास (जंगल) में सुरक्षित छोड़ने की तैयारी कर रही है।
जानिए क्या होता है 'कस्तूरी बिलाव' (मुर्दाखोर)
प्रजाति: यह बिल्ली की प्रजाति का ही एक मांसाहारी जीव है, जिसे अंग्रेजी में "Civet" कहा जाता है।
भ्रम और सच्चाई: ग्रामीण इलाकों में इसे 'मुर्दाखोर' कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर श्मशान घाटों या सुनसान जगहों के आसपास देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह छोटे जीवों, फल और कीड़े-मकोड़ों को अपना शिकार बनाता है। विशेषता: इसके शरीर से एक खास तरह की गंध (मस्क) निकलती है, जिसके कारण इसे कस्तूरी बिलाव कहा जाता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसे सुरक्षा प्राप्त है।