Shikshamitra News: शिक्षामित्रों की पेंशन और ग्रेच्युटी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 6 सप्ताह में सकारण आदेश जारी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने मृतक शिक्षामित्र की पत्नी की याचिका पर सुनाया फैसला; 25 वर्षों से कार्यरत संविदाकर्मियों की सामाजिक सुरक्षा पर उठाए सवाल
विधि संवाददाता, भदैनी मिरर: उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों के हक में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने वाराणसी में कार्यरत एक मृतक शिक्षामित्र की पत्नी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) वाराणसी को निर्देश दिया है कि वह छह सप्ताह के भीतर नियमानुसार याची की बात सुनकर सकारण (कारण सहित) आदेश पारित करें।
हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए दिया यह आदेश
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने वाराणसी की शहनाज बेगम की याचिका पर उनके अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी को सुनने के बाद दिया है। कोर्ट ने मामले को निस्तारित करते हुए याची (शहनाज बेगम) को भी निर्देशित किया है कि वह अगले तीन सप्ताह के भीतर नए सिरे से विभाग के सामने अपना प्रत्यावेदन (Application) प्रस्तुत करें, जिस पर बीएसए वाराणसी को छह सप्ताह में अंतिम फैसला लेना होगा।
क्या है पूरा मामला और क्यों पड़ी याचिका की जरूरत?
मामला वाराणसी का है, जहाँ प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षामित्र की महज 48 वर्ष की आयु में असामयिक मृत्यु हो गई थी। पति के निधन के बाद उनकी पत्नी शहनाज बेगम ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से नियमानुसार पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) के भुगतान के लिए अनुरोध किया था।
तलाश का कारण: लंबे समय तक गुहार लगाने के बावजूद जब वाराणसी बीएसए कार्यालय द्वारा इस पर कोई उचित निर्णय नहीं लिया गया, तब हार मानकर पीड़िता ने न्याय के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
25 वर्षों की सेवा के बाद भी न पेंशन, न ग्रेच्युटी: अधिवक्ता
अदालत में याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों की दयनीय स्थिति और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
अधिवक्ता द्वारा कोर्ट में रखी गई मुख्य बातें:
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मानदेय की स्थिति: यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 1 लाख 70 हजार शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इन्हें पहले मात्र 10 हजार रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रति माह किया गया है।
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25 साल की सेवा: कई शिक्षामित्र पिछले 25 वर्षों से लगातार शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें ग्रेच्युटी या पेंशन का कोई लाभ नहीं मिलता।
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भविष्य निधि कानून का हवाला: 'ग्रेच्युटी ऑफ पेमेंट एक्ट' और 'कर्मचारी भविष्य निधि कानून' शैक्षणिक संस्थानों पर भी पूरी तरह लागू होते हैं।
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संवैधानिक अधिकार: संविधान की धारा 39, 42, 43 और 47 के तहत संविदाकर्मियों, दैनिक वेतन भोगियों और अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) देना राज्य सरकार का दायित्व है। इसके बावजूद सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उनके परिजनों को बेसहारा छोड़ दिया जाता है।
अब हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद वाराणसी शिक्षा विभाग को छह सप्ताह के भीतर इस संवेदनशील मामले पर अपना लिखित और स्पष्ट रुख साफ करना होगा।