शंकराचार्य का एलान- लखनऊ में विद्वानों की होगी सभा और 12 मार्च को होगा ’गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ शंखनाद
गाय को राज्य माता घोषित करने व बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सरकार को दी गई चेतावनी की 40 दिन की अवधि 11 मार्च को होगी पूरी
11 मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पासी किला चौराहा, आशियाना में विद्वानों की होगी सभा
वाराणसी, भदैनी मिरर। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन स्नान से प्रशासन द्वारा रोकने और बटुकों की चुटिया खींचकर दुर्व्यवहार के बाद शासन-प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंकनेवाले ज्योतिष पीठ के शंराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अब वह 11 और 12 मार्च को लखनऊ में सत्ता को अपनी ताकत का अहसास कराएंगे। इसके लिए बाकायदा नौ से 11 मार्च के कार्यक्रमों की भी घोषणा कर दी गई है।
मौनी अमावस्या के दिन हुए दुर्व्यवहार से क्षुब्ध शंकराचार्य ने उसी दिन से शासन और प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। देशभर में तमाम प्रतिक्रियाएं हुई, सत्ता के दो डिप्टी सीएम और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती तक ने शंकराचार्य के साथ हुई घटना को गलत ठहराया लेकिन योगी आदित्यनाथ खेद व्यक्त करने के वजाय अपरोक्ष रूप से ‘कालनेमि‘ तक कह डाला। यही नही सदन में बयान दिया कि हर कोई शंकराचार्य लिख कर चल नही सकता। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती परम्परा से शंकराचार्य बने, अम्बानी के बेटे की शादी में बकायदा शंकराचार्य की ही हैसियत से पहुंचे और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे आशीर्वाद लिया। इसके बावजूद योगी का यह कहना कि हर कोई शंकराचार्य लिखकर नही चल सकता, तो शंकराचार्य ने भी बता दिया कि वह ‘हर कोई‘ नही हैं। सत्ता से टकराने का नतीजा यह हुआ कि शंकराचार्य पर यौन शोषण का आरोप लगा और मुकदमा दर्ज कर लिया गया। फिलहाल हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली है।
अब रविवार को शंकराचार्य ने प्रेसवार्ता में बताया कि एक बार फिर आंदोलन की रूपरेखा तय हो गई है। गोमाता के संरक्षण के लिए धर्म युद्ध का आगाज लखनऊ में होगा। देश के विभिन्न भागों से आये धर्माचार्य, साधु-संत और अनुयायी इसमें शामिल होंगे। केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में पत्रकारों से बातचीत में कहाकि 6 मार्च को संकल्प दिवस बनेगा फिर 11 मार्च तक विभिन्न स्थानों पर निर्णायक शंखनाद होगा। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गो माता का संरक्षण केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गो माता हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और उनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। इस धर्म युद्ध का उद्देश्य समाज में गो माता के प्रति जागरूकता फैलाना और उनके संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि गो माता को राज्य माता घोषित करने व प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की उनकी ओर से सरकार को दी गई 40 दिन की अवधि पूर्ण होने पर 12 मार्च को लखनऊ में गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध का शंखनाद किया जाएगा। 30 दिन पूर्ण हो चुके हैं और शेष 10 दिनों में प्रदेश सरकार यदि उनकी मांगों को नहीं पूर्ण करती तो उसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। इस निमित्त छह मार्च से लेकर 11 मार्च तक के विविध कार्यक्रम होंगे। छह मार्च को शंकराचार्य घाट पर ’गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ वीर शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर गंगामाता की पूजा कर धर्मयुद्ध शंखनाद का संकल्प होगा।
सात मार्च को सुबह 8.30 बजे श्रीविद्या मठ से प्रस्थान कर संकटमोचन मंदिर में संकटमोचन हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ के साथ विघ्नों के नाश की प्रार्थना कर यात्रा शुरू की जाएगी। यात्रा के दौरान उसी दिन जौनपुर, सुल्तानपुर व रायबरेली में सभा व रात्रि विश्राम होगा। आठ मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज अचलगंज व उन्नाव में सभा एवं रात्रि विश्राम होगा। नौ मार्च को उन्नाव, बांगरमऊ बघौली नैमिषारण्य में सभा एवं रात्रि विश्राम होगा। फिर 10 मार्च को नैमिषारण्य से प्रस्थान कर सिधौली इटौंजा में सभा करते हुए लखनऊ सीमा में प्रवेश एवं रात्रि विश्राम किया जाएगा। 11 मार्च को दोपहर सवा दो से पांच बजे तक कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा, आशियाना में विद्वानों की सभा होगी।