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Video: "मांग का सिंदूर उजड़े सात दिन बीते, अब बस कांपते होंठों पर 'एनकाउंटर' की आस"

राजनैतिक दलों के परिजनों से मिलने का सिलसिला जारी, फरार आरोपियों पर घोषित है इनाम

 

वाराणसी, भदैनी मिरर। जनपद के फूलपुर थाना क्षेत्र के घमहापुर गांव में बीते रविवार देर रात मॉब लिंचीग की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। कार की टक्कर से एक महिला के घायल होने के बाद अकेले मनीष सिंह (38) की पीट- पीटकर नृशंस हत्या कर दी गई।  पुलिस ने घटना में शामिल मनोज प्रजापति, हरिश्चंद्र राजभर, योगेंद्र प्रजापति और अभिषेक को जेल तो भेज दिया, लेकिन मुख्य आरोपी सहित 5  अभी भी फरार है। पुलिस ने उन पर 25-25 हजार के इनाम की घोषणा की है।

 

 

सिंदूर की कसम, न्याय की आस


38 वर्षीय पति मनीष सिंह की हत्या के बाद बेबस पत्नी अंकिता का जीवन "सात दिन, सात रातें और अंतहीन सन्नाटे में कट रहा है। मनीष की पत्नी अंकिता शनिवार को भदैनी मिरर के कैमरे पर आई। बोलने की स्थिति में न होते हुए सिसकियों और कांपती आवाज़ में सिर्फ 'इंसाफ' की गुहार लगा रही है। वह कह रही है कि "मांग का सिंदूर उजड़े सात दिन बीत जाने के बाद केवल लोगों के आने-जाने का सिलसिला जारी है। न्याय केवल आस बनाकर रह गई है। अंकिता को केवल पति के हत्यारों का इनकाउंटर चाहिए। 


पापा की आस में बेटियां

"मनीष हत्याकांड के सात दिन बाद भी विधवा की आंखों में प्रतिशोध सुलग रहा है। वह चाहती है कि उनका प्रतिशोध कानून अपने हिसाब से करे। अंकिता रोते हुए कहती है कि, हर रोज बेटियां पापा को पूछती है, आखिर मैं उन्हें क्या जवाब दूं? लोगों को दरवाजे पर आते और पापा की गैर मौजूदगी बेटियां को पीड़ा दे रही है। 

मोदी-योगी से मुलाकात चाहती है अंकिता 


भदैनी मिरर के कैमरे पर पति हो हाल ही में खोई "एक बेबस पत्नी विलाप" करते हुए कहती है कि, अब तो इंसाफ कर दो साहब'। अंकिता कहती है, हमें सिर्फ इनकाउंटर चाहिए। प्रशासन के लोग केवल आश्वासन दे रहे है, आश्वासन देने का सिलसिला सात दिन से जारी है, लेकिन न्याय मिलता नहीं दिख रहा है। पहले आरोपियों का इनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई हो, फिर मुझे योगी-मोदी जी से मिलना है ।


इकलौता कमाने के जरिया थे मनीष

दोना-पत्तल कारोबारी मनीष सिंह अपने परिवार में इकलौता कमाने वाले शख्स थे। युवा कारोबारी की हत्या से न केवल उनकी पत्नी का सुहाग उजड़ा है, बल्कि मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। मनीष परिवार में कमाने वाले इकलौते शख़्स थे, जिनके कंधे पर परिवार का जिम्मा था, इस घटना के बाद पूरा परिवार टूट गया है और बस न्याय की उम्मीद के सहारे हर रात अपनी काट रहा है।