समूह लोन के नाम पर महाघोटाला: ₹55 हजार पास कराकर महिलाओं को दिए केवल ₹29-30 हजार, ₹72 हजार वसूली और गुंडागर्दी पर उतारे बैंक कर्मी
वाराणसी में 'जना स्मॉल फाइनेंस बैंक' और एजेंटों की मिलीभगत से 50 से अधिक महिलाओं के साथ लाखों की ठगी; पीड़ित महिलाओं ने पुलिस कमिश्नर से लगाई न्याय की गुहार।
वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर 'समूह लोन' (Group Loan) में बड़े फर्जीवाड़े और आर्थिक उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोहता और आसपास के ग्रामीण इलाकों की लगभग 50 से अधिक पीड़ित महिलाओं ने जिला मुख्यालय पहुंचकर पुलिस कमिश्नर को प्रार्थना पत्र सौंपा है। महिलाओं का आरोप है कि बैंक अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से उनके खातों से पैसे उड़ाए गए और अब उनसे दोगुनी-तिगुनी रकम की अवैध वसूली के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
फर्जीवाड़े का तरीका: पास हुआ ₹55,000, हाथ में आया आधा पैसा
भाजपा महिला मोर्चा की जिला मीडिया प्रभारी मुमताज बानू और पीड़ित महिलाओं (सोनम, मनोरमा, सायना, सना आदि) ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें व्यापार और स्वरोजगार के लिए ₹55,000 का लोन स्वीकृत किया गया था।
लेकिन जब बैंक से पैसा निकला, तो बायोमेट्रिक/अंगूठा लगवाकर और बिना सहमति के एजेंटों व बैंककर्मियों ने आधे से अधिक पैसे काट लिए। महिलाओं को केवल ₹29,000 से ₹30,000 थमाए गए। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो बैंककर्मियों ने यह कहकर चुप करा दिया कि "बाकी पैसा 6 महीने या साल भर बाद मिलेगा।"
कटौती के बाद भी वसूली ₹72,000 की, घर पर दी जा रही गंदी गालियां
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि 14-15 महीने तक लगातार किस्त भरने के बावजूद कटा हुआ पैसा उन्हें वापस नहीं दिया गया। उल्टा अब बैंककर्मी और रिकवरी एजेंट उनके घर पहुंचकर अभद्रता, गालियां और जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं।
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अवैध वसूली का दबाव: जिन महिलाओं को केवल ₹30,000 मिले, उनसे ब्याज और मूलधन मिलाकर ₹65,000 से ₹72,000 तक जमा करने के लिए कहा जा रहा है।
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बदतमीजी और गुंडागर्दी: मना करने पर घर के दस्तावेज (कागज) गिरवी रखने, गाड़ियां उठाने और घर की महिलाओं व बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।
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एक ही घर में कई लोन: नियमों को ताक पर रखकर एक-एक घर के 5 से 10 सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत करा लिए गए।
थाने में नहीं हुई सुनवाई, बैंक मैनेजर पर झूठे साक्ष्य बनाने का आरोप
महिलाओं ने बताया कि इससे पहले उन्होंने सिगरा और लोहता थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस द्वारा बैंक से दस्तावेज मांगे जाने पर बैंककर्मी कोई वैध सबूत पेश नहीं कर सके।
पीड़ितों का गंभीर आरोप है कि बैंक मैनेजर और एजेंट (प्रतिमा, दीपक आदि) मिलकर फर्जी कागजात और झूठे सबूत तैयार कर रहे हैं ताकि कागजों पर दिखाया जा सके कि महिलाओं ने पूरा ₹55,000 प्राप्त किया है। बैंक के सीसीटीवी फुटेज और खाते के लेनदेन (Bank Statement) की निष्पक्ष जांच से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।
कमिश्नर से गुहार, एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग
वाराणसी पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर महिलाओं ने ज्ञापन सौंपा और मांग की है कि:
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'जना स्मॉल फाइनेंस बैंक' के संबंधित अधिकारियों और बिचौलिए एजेंटों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और जबरन वसूली (Extortion) की धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।
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महिलाओं के साथ हो रही अभद्रता और मानसिक उत्पीड़न को तुरंत रोका जाए।
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मामले की निष्पक्ष जांच कराकर महिलाओं के कटे हुए पैसे वापस दिलाए जाएं।
पुलिस कमिश्नर ने महिलाओं की शिकायत पर मामले की जांच लोहता पुलिस को सौंपते हुए उचित वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।