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संकटमोचन संगीत समारोह: शिवमणि ने ड्रम-बाल्टी से रचा सुरों का जादू, हनुमत दरबार में बंधा समां

घंट-घड़ियाल, शंख और जलभरी बाल्टी से अनोखा वादन

 
वाराणसी, भदैनी मिरर। Sankat Mochan Sangeet Samaroh में मंगलवार की शाम संगीत और प्रयोगधर्मिता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब पद्मश्री Shivamani ने अपने अनोखे वादन से हनुमत दरबार में समां बांध दिया।
प्रख्यात तबला वादक पं. बिरजू महाराज की उस सीख—“जीवन के हर कदम में लय है”—को साकार करते हुए शिवमणि ने ड्रम के साथ-साथ रोजमर्रा की वस्तुओं को वाद्ययंत्र बनाकर प्रस्तुत किया।
अनोखे वाद्य, अद्भुत प्रस्तुति
शिवमणि मंच पर पारंपरिक ड्रम सेट के साथ खाली और पानी से भरी बाल्टियां, शृंगी, शंख, घंट-घड़ियाल और घुंघरू जैसे असामान्य ‘वाद्य’ लेकर पहुंचे।
जब उनकी स्टिक ड्रम से होते हुए बाल्टी और शृंगी पर उसी ताल में चलने लगी, तो श्रोताओं की तालियां गूंज उठीं।
सुरों की बहती धारा
उनकी प्रस्तुति के दौरान U. Rajesh के मेडोलिन ने सुरों की मिठास घोली, वहीं उनके शिष्य प्रियेष पाठक ने भी संगत कर कार्यक्रम को और प्रभावशाली बना दिया।
महंत जी ने भी की संगत
प्रस्तुति के बीच में Prof. Vishwambhar Nath Mishra मंच पर पहुंचे और कलाकारों के साथ पखावज पर संगत की, जिससे माहौल और अधिक आध्यात्मिक हो गया।
इस दौरान “रघुपति राघव राजा राम”, “अच्युतम केशवम” और “श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी” जैसी धुनों ने पूरे वातावरण को भक्ति और संगीत में सराबोर कर दिया।
अंत में शंखनाद के साथ इस अनूठी प्रस्तुति का समापन हुआ, जिसे श्रोताओं ने लंबे समय तक याद रखने वाला अनुभव बताया।