BHU के बाद संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की बड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे प्रो. ब्रजभूषण ओझा सभी निकायों से प्रतिबंधित
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (संविवि) ने प्रो. ब्रजभूषण ओझा को सभी प्रशासनिक, शैक्षणिक व चयन समितियों से हटाया।
वाराणसी (भदैनी मिरर)। भ्रष्टाचार और अनियमतताओं के गंभीर आरोपों में घिरे प्रो. ब्रजभूषण ओझा पर बीएचयू (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के बाद अब संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (संविवि) ने भी कड़ा शिकंजा कस दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रो. ओझा को सभी प्रशासनिक, शैक्षणिक और चयन समितियों की सदस्यता से तत्काल प्रभाव से हटाते हुए भविष्य के लिए भी प्रतिबंधित कर दिया है।
संविवि कुलसचिव ने जारी किया सख्त आदेश
संविवि के कुलसचिव राकेश कुमार द्वारा बुधवार को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रो. ब्रजभूषण ओझा को विश्वविद्यालय की समस्त चयन समितियों, विशेषज्ञ पैनल, अध्ययन बोर्ड (Board of Studies) के साथ-साथ परीक्षा, मूल्यांकन और अन्य सभी शैक्षणिक व प्रशासनिक निकायों से बाहर कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस फैसले में 'जीरो टॉलरेंस' नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए स्पष्ट किया कि संस्थागत साख और उच्च नैतिक मानकों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो-ऑडियो बना कार्रवाई का आधार
जारी आदेश में कहा गया है कि हाल ही में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रो. ओझा से संबंधित गंभीर प्रकृति के ऑडियो-वीडियो और सामग्री प्रसारित हुई थी। इन वायरल सामग्रियों के संज्ञान में आने के बाद उनकी संस्थागत निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए थे।
विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा, निष्पक्षता और साख को बनाए रखने के उद्देश्य से कुलपति के निर्देशानुसार यह एहतियाती व प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
एक दिन पहले BHU ने विश्वनाथ मंदिर व्यवस्थापक पद से था हटाया
उल्लेखनीय है कि इससे ठीक एक दिन पहले मंगलवार को बीएचयू प्रशासन ने भी प्रो. ब्रजभूषण ओझा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय परिसर स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (VT) के मानित व्यवस्थापक पद से मुक्त कर दिया था।
24 घंटे के भीतर वाराणसी के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा की गई इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई के बाद संस्कृत शिक्षण जगत और शिक्षा गलियारे में हड़कंप मच गया है। संस्कृत विश्वविद्यालय का यह कड़ा रुख शहर में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।