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झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में BHU में एक दिवसीय उपवास, युवाओं ने बुलंद की आवाज

"2047 के विकसित भारत में युवाओं की अनदेखी क्यों?" – झारखंड लाठीचार्ज पर भड़के BHU छात्र

 

वाराणसी (भदैनी मिरर)। झारखंड में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों का आक्रोश सामने आया है। आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में BHU के विद्यार्थियों ने परिसर स्थित छात्रसंघ भवन में चंद्रशेखर आजाद जी और पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बुधवार, 12 अगस्त 2026 को एक दिवसीय उपवास एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया।


यह उपवास कार्यक्रम 'समस्त महामना परिवार' के आह्वान पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किया गया।

दूर-दराज के छात्रों में हौसला बढ़ाएगा यह उपवास


उपवास में शामिल बीएचयू छात्र अभय सिंह ने कहा कि यह एक दिवसीय उपवास झारखंड में अन्याय के खिलाफ लड़ रहे विद्यार्थियों में एक नया हौसला और संबल पैदा करेगा। उन्हें यह संदेश मिलेगा कि अपनी वाजिब मांगों की लड़ाई में वे अकेले नहीं हैं, बल्कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय का छात्र समुदाय उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

अभय सिंह ने कहा, "जब हम स्वयं आंदोलन करते हैं और देश के अन्य हिस्सों से समर्थन मिलता है, तो हमारे संघर्ष को मजबूती मिलती है। देश में युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है, ऐसे में सरकारों को युवाओं की आवाज दबाने या उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय उनकी मांगों को सुनना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि केवल संवाद का दिखावा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि छात्रों की समस्याओं का ठोस और न्यायसंगत समाधान निकालना होगा।


"2047 के विकसित भारत की बात और युवाओं पर लाठीचार्ज – यह कैसा न्याय?"


काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र परिषद सदस्य अभिषेक सिंह ने सरकार की नीतियों और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में युवाओं को सबसे प्रमुख भागीदार बताती है, वहीं दूसरी तरफ अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे निर्दोष युवाओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया जाता है।

अभिषेक सिंह ने कहा, "यदि देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, तो उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उन पर लाठियां भांजना कहां का न्याय है? हमारा यह उपवास किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं है, बल्कि यह देश के हर उस छात्र के समर्थन में है जिसके साथ अन्याय हो रहा है।"

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और निजी एजेंसियों पर सवाल


प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने देश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। अभिषेक सिंह ने कहा कि अस्थायी व्यवस्था (जैसे गेस्ट फैकल्टी या कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) से शिक्षा क्षेत्र में स्थायित्व नहीं आ सकता।

उन्होंने परीक्षाओं के आयोजन में निजी एजेंसियों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा, "जब केंद्र और राज्य सरकारों के पास अपनी आधिकारिक संस्थाएं मौजूद हैं, तब परीक्षाओं को प्राइवेट एजेंसियों को देकर बाजार क्यों खड़ा किया जा रहा है? इसी बाजारीकरण की वजह से आज अव्यवस्था और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ की स्थिति बन रही है। अगर सरकारें समय रहते इन समस्याओं का हल नहीं निकालेंगी तो देश में अराजकता की स्थिति बनेगी, जो समाज और देश दोनों के लिए ठीक नहीं है।"

शांतिपूर्ण संवाद से समाधान निकालने की अपील

BHU के छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका यह उपवास एक सांकेतिक विरोध दर्ज कराने और देश भर के छात्रों तक एकजुटता का संदेश पहुंचाने के लिए था। उन्होंने संबंधित सरकार से मांग की कि वह आंदोलनरत छात्रों के प्रति दमनकारी नीतियां छोड़कर संवाद स्थापित करे और उनकी मांगों को अविलंब पूरा करे। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं की जायज मांगों को अनदेखा किया गया तो आगे की रणनीति तय कर इस लड़ाई को और मजबूती से लड़ा जाएगा।