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News: भोजपुर में 'फर्जी एनकाउंटर' के आरोप से हड़कंप, भरत तिवारी की मौत पर बिहार पुलिस के खिलाफ भारत सरकार से गुहार

Bhojpur Police Encounter Controversy: शाहपुर के बिलोटी गांव के रहने वाले भरत तिवारी की कथित मुठभेड़ में मौत पर परिजनों ने उठाए सवाल। सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अनदेखी और आत्मसमर्पण के बाद भी गोली मारने का आरोप।

 

(भदैनी मिरर): बिहार के भोजपुर जिले से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पुलिस मुठभेड़ की एक घटना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। भोजपुर के शाहपुर थाना अंतर्गत ग्राम बिलोटी के निवासी भरत तिवारी की कथित एनकाउंटर में हुई मौत के मामले में परिजनों और स्थानीय लोगों ने बिहार पुलिस पर 'फर्जी एनकाउंटर' का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।

"आत्मसमर्पण के बाद भी मारी गईं कई गोलियां" - पत्र में गंभीर आरोप

भारत सरकार को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि बीते 17 जून 2026 को दिन-दहाड़े पुलिस द्वारा इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि मृतक भरत तिवारी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, बल्कि वह केवल दबे-कुचले लोगों की आवाज उठाने का काम करते थे।

आरोप है कि कथित मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी द्वारा आत्मसमर्पण (Surrender) कर देने के बावजूद उन्हें सुनियोजित तरीके से एक के बाद एक कई गोलियां मारी गईं। इस घटना को मानवीय मूल्यों और मानवाधिकारों की मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस की अनदेखी का आरोप

शिकायत पत्र में माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा पुलिस एनकाउंटर को लेकर पारित किए गए विधि सिद्धांतों का भी हवाला दिया गया है। परिजनों का आरोप है कि कानूनन किसी भी मुठभेड़ या घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना पुलिस का नैतिक और कानूनी दायित्व होता है।

परंतु, इस मामले में स्थानीय पुलिस कथित तौर पर घायल भरत तिवारी को तड़पता हुआ घटना स्थल पर ही छोड़कर चली गई, जिससे उनकी मौत हो गई। इस प्रकार पुलिस ने अपने प्राथमिक दायित्व का भी निर्वहन नहीं किया।

पुनर्वास योजनाओं का हवाला, एफआईआर की मांग

पत्र में केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जहां एक तरफ भारत सरकार नक्सलियों और आतंकवादियों तक को मुख्यधारा में लाने के लिए पुनर्वास योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ एक बेकसूर नागरिक को आत्मसमर्पण के बाद भी मौत के घाट उतार दिया गया।

घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों या दोषियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, जिसे पूर्णतया विधि-विरुद्ध बताया गया है। इस कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर आम जनमानस में भारी आक्रोश व्याप्त है। मांग की गई है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराते हुए हत्यारोपियों के विरुद्ध तत्काल विधिक कार्रवाई की जाए।