वाराणसी में 'मिशन शक्ति 5.0': संत अतुलानंद एकेडमी में छात्राओं को मिले आत्मरक्षा व साइबर सुरक्षा के टिप्स
कैंट ACP प्रज्ञा पाठक ने छात्राओं को किया जागरूक; स्कूल-कोचिंग के बाहर एंटी रोमियो स्क्वाड की पेट्रोलिंग तेज, साइबर ठगी से बचने के बताए उपाय।
भदैनी मिरर (डिजिटल डेस्क), वाराणसी: वाराणसी पुलिस आयुक्त के निर्देशन में चलाए जा रहे 'मिशन शक्ति अभियान (फेज-5)' के तहत सोमवार को गिलटबाजार स्थित संत अतुलानंद रेजिडेंशियल एकेडमी में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद कैंट एसीपी प्रज्ञा पाठक ने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद कायम कर उन्हें सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति जागरूक किया।
संकट के समय एक कॉल दूर है पुलिस
एसीपी प्रज्ञा पाठक ने अभियान के तीन मुख्य स्तंभों— नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को संकट के समय उपयोग में आने वाले आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी:
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महिला हेल्पलाइन: 1090
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आपत्कालीन सेवा: 112
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चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
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साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930
उन्होंने छात्राओं को आश्वस्त किया कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराने के बजाय इन नंबरों का प्रयोग करें, पुलिस तुरंत मदद के लिए पहुंचेगी।
एंटी रोमियो स्क्वाड की पेट्रोलिंग तेज, परिजनों की होगी काउंसलिंग
एसीपी ने बताया कि शहर के प्रमुख चौराहों, बालिका विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों के बाहर 'मिशन शक्ति' और एंटी रोमियो टीमों की गश्त बढ़ा दी गई है। विशेषकर स्कूल छूटने की समय-सीमा पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनचलों और अनुशासनहीनता करने वाले छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर उनकी काउंसलिंग भी कराई जा रही है।
साइबर अपराधों से बचाव के बताए गुर
डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर क्राइम से बचाव के लिए छात्राओं को सतर्क रहने की सलाह दी गई:
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अपना ओटीपी (OTP) या बैंक विवरण किसी से साझा न करें।
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सोशल मीडिया या मैसेज में आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
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फर्जी कस्टमर केयर नंबरों और अनधिकृत UPI पेमेंट रिक्वेस्ट से बचें।
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साइबर ठगी या वित्तीय धोखाधड़ी होने पर बिना देरी किए तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
प्रशासन के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अविनाश पाण्डेय ने मिशन शक्ति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई से बेहतर है कि उन्हें होने ही न दिया जाए, जिसके लिए सामाजिक मानसिकता में बदलाव जरूरी है। उन्होंने इस अभियान को ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक व्यापक रूप से ले जाने पर जोर दिया।
वहीं, विद्यालय की निदेशिका डॉ. दिव्या सिंह ने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा केवल पुलिस-प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब छात्राएं अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक होंगी, तभी उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी।