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MGKVP:  छात्रों का बड़ा हंगामा, MSW विभाग के गेट पर जड़ा ताला, विभागाध्यक्ष पर लगाया नंबरों में हेरफेर का आरोप

मौखिक परीक्षा का बहिष्कार कर धरने पर बैठे छात्र; गोल्ड मेडल के लिए 'फेवरेटिज्म' और प्लेसमेंट न होने का फूटा गुस्सा

 

 

भदैनी मिरर, वाराणसी।
वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) में एक बार फिर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा है। विश्वविद्यालय के सोशल वर्क फैकल्टी (MSW) के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने रिजल्ट में धांधली, मौखिक परीक्षा में कम नंबर दिए जाने और विभाग में कथित 'जातिवाद' के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को उग्र छात्रों ने मौखिक परीक्षा (Viva) का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया और विभाग के मुख्य गेट पर ताला जड़कर विभागाध्यक्ष (HOD) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग की।

छात्रों का आरोप है कि कुलपति ने पहले इस मामले में नंबरों के संशोधन का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद बिना किसी सुधार के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा रख दी गई, जिससे छात्र भड़क गए।

"चाटुकारिता और जातिवाद के आधार पर मिल रहे नंबर" - छात्रा का आरोप


प्रदर्शन में शामिल समाज कार्य विभाग की छात्रा महिमा अग्रहरी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। महिमा ने बताया, "हम छात्र दो साल तक पूरी ईमानदारी से मेहनत करते हैं, लेकिन विभाग में नंबरों के नाम पर सिर्फ 'कॉपी-पेस्ट' का खेल चल रहा है। यहाँ योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि जातिवाद और चाटुकारिता के आधार पर नंबर बांटे जा रहे हैं। जो बच्चे विभाग में कभी दिखाई भी नहीं देते, उन्हें सबसे हाई नंबर मिलते हैं क्योंकि वे प्रोफेसरों के प्रिय हैं।"

छात्रा ने अपना व्यक्तिगत दर्द साझा करते हुए विभाग पर संवेदनहीनता का भी आरोप लगाया। उसने कहा, "मेरे चाचा की तबीयत बेहद खराब थी, जिसके बारे में मैंने एचओडी मैम को फोन पर जानकारी दी थी। लेकिन उन्होंने बेहद संवेदनहीनता से कहा कि तुम्हारे चाचा के लिए विभाग का वाइवा नहीं रुकेगा। आज जब हम प्रोटेस्ट कर रहे हैं, तो वो ऑनलाइन वाइवा की बात कहकर सहानुभूति बटोर रही हैं, जबकि पहले उन्होंने ऐसा कोई विकल्प नहीं दिया। आज मेरे चाचा इस दुनिया में नहीं रहे।"


चिन्हित छात्रों को गोल्ड मेडल दिलाने का खेल, प्लेसमेंट सेल भी गायब – रितिक सिंह


धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व छात्रसंघ महामंत्री प्रत्याशी रितिक सिंह ने विश्वविद्यालय की साख और दावों पर तीखा हमला बोला। रितिक ने कहा, "विद्यापीठ दावा करता है कि वह रैंकिंग में अव्वल है, लेकिन हकीकत यह है कि साल 2022 के बाद से MSW जैसे प्रोफेशनल कोर्स में एक भी बच्चे का प्लेसमेंट नहीं हुआ है। करोड़ों रुपये के जो प्रोजेक्ट आते हैं, उनमें विद्यापीठ के होनहार छात्रों को दरकिनार कर इलाहाबाद, दिल्ली और लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों से काम कराया जाता है।"

रितिक ने आगे आरोप लगाया, "एजेंसी और कुछ शिक्षकों की मिलीभगत से जानबूझकर 8-10 चिन्हित बच्चों को टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट बनाने का खेल खेला जाता है। इसके लिए बाकी आम छात्रों के इंटरनल नंबर काट दिए जाते हैं। जो बच्चे परीक्षा और डेजर्टेशन फाइल जमा करते हैं, उन्हें भी एब्सेंट या फेल दिखा दिया जाता है। हम मांग करते हैं कि तत्काल प्रभाव से नंबरों को संशोधित कर नया रिजल्ट जारी किया जाए और कैंपस में प्लेसमेंट सेल को सक्रिय किया जाए।"


प्रशासन को मिला 24 घंटे का अल्टीमेटम


विभाग में तालाबंदी कर धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर विचार कर नंबरों का संशोधन नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।