Varanasi: मंडुआडीह केस में हाईकोर्ट से बड़ी राहत, तीन आरोपियों को अग्रिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या से आत्महत्या के लिए उकसाने में बदले केस में दी राहत, संपत्ति विवाद को नहीं माना उकसावा; वाराणसी के अधिवक्ता विकास पांडेय की भूमिका सराही गई
वाराणसी/प्रयागराज, भदैनी मिरर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के मंडुआडीह थाना क्षेत्र से जुड़े एक संवेदनशील मामले में तीन आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद पारित किया।
अदालत से राहत पाने वाले आवेदकों में कमल कपूर, रंजना कपूर और कार्तिकेय सिंह शामिल हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आ गया है।
युवा अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी चर्चा में
इस केस में आवेदकों की ओर से अधिवक्ता राहुल अग्रवाल और सोमेश दत्त त्रिपाठी के साथ वाराणसी के रामनगर निवासी युवा अधिवक्ता विकास कुमार पांडेय ने मजबूत पैरवी की।
बताया जा रहा है कि विकास पांडेय ने स्थानीय परिस्थितियों, पारिवारिक पृष्ठभूमि और घटनाक्रम को विस्तार से अदालत के सामने रखा, जिससे आवेदकों को राहत मिलने में मदद मिली। उनकी इस प्रभावी पैरवी की विधिक हलकों में सराहना हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
मामला थाना मंडुआडीह में दर्ज अपराध संख्या 05/2026 से जुड़ा है। शुरुआत में इस केस को हत्या (धारा 103 BNS) के तहत दर्ज कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन बाद में इसे आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 108 BNS) में परिवर्तित कर दिया गया।
इससे पहले वाराणसी जिला न्यायालय ने 23 फरवरी 2026 को आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भाइयों के बीच संपत्ति या सामान्य विवाद को सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
इसी आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
कानूनी दृष्टि से क्यों अहम है फैसला?
यह फैसला उन मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां पारिवारिक या संपत्ति विवाद को गंभीर आपराधिक धाराओं में बदल दिया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाने से जोड़ना उचित नहीं है।
विधिक हलकों में चर्चा तेज
इस निर्णय के बाद वाराणसी और प्रयागराज के कानूनी क्षेत्र में युवा अधिवक्ता विकास पांडेय की पैरवी की चर्चा हो रही है। इसे एक मजबूत और तथ्य आधारित कानूनी प्रस्तुति का उदाहरण माना जा रहा है।