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वाराणसी में अधिवक्ताओं का फूटा गुस्सा: सोनम वांगचुक के समर्थन और छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ DM कार्यालय पर प्रदर्शन

जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं से बर्बरता, पर्चा लीक और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच को लेकर वकीलों का आक्रोश; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और PM-गृहमंत्री से माफी की मांग।

 

वाराणसी (भदैनी मिरर ): दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए कथित बर्बर लाठीचार्ज और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में अब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के अधिवक्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है।

बुधवार को वाराणसी जिला मुख्यालय (DM पोर्टिको) पर अधिवक्ताओं ने एकत्र होकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन और धरना दिया। इसके पश्चात अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदय को संबोधित एक 7-सूत्रीय मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।

जंतर-मंतर पर छात्रों और छात्राओं के साथ बर्बरता का आरोप

धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वाराणसी कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता मनमोहन गुप्ता ने भदैनी मिरर से खास बातचीत में कहा कि देश में शिक्षा सुधार, समय पर परीक्षा कराने और नीट (NEET) जैसे पेपर लीक मामलों को लेकर छात्र जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोप लगाते हुए कहा:

"जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे निहत्थे बच्चों पर दिल्ली पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं। पुलिस और सादे लिबास में मौजूद असामाजिक तत्वों ने छात्र-छात्राओं के साथ घिनौनी हरकतें कीं, उनके कपड़े फाड़े और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। यह लोकतंत्र और संविधान की सीधी हत्या है।"

सोनम वांगचुक की चिकित्सीय जांच और निष्पक्षता की मांग

राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में अधिवक्ताओं और नागरिकों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और CJP द्वारा चलाए जा रहे लोकतांत्रिक आंदोलन का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने मांग की कि सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए न्यायिक निगरानी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से उनकी त्वरित व नियमित जांच कराई जाए और स्वास्थ्य रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।

राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन की 7 प्रमुख मांगें:

  1. सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच: उनके आंदोलन से जुड़े जनहित के मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए तथा न्यायिक निगरानी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से नियमित मेडिकल जांच हो।

  2. संवैधानिक अधिकारों की रक्षा: आंदोलनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

  3. मुकदमे वापस हों: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं और आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत रद्द किए जाएं।

  4. केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें अथवा उन्हें बर्खास्त कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

  5. PM व गृहमंत्री देश से माफी मांगें: जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की घटना पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री संज्ञान लें तथा देश से बिना शर्त माफी मांगें।

  6. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई: लाठीचार्ज में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों और सादे लिबास में मौजूद उपद्रवियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

  7. सार्थक संवाद: सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सम्मानजनक संवाद स्थापित कर संवैधानिक समाधान निकाला जाए।

"लोकतंत्र में संवाद जरूरी, तानाशाही नहीं चलेगी"

अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक निहत्थे छात्रों को न्याय नहीं मिलता और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि देश की जनता और नौजवान अब जाग चुके हैं और सरकार को हठधर्मिता छोड़कर छात्रों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी होगी।