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काशी विद्यापीठ: एडेड कॉलेजों में दोहरी व्यवस्था के खिलाफ शिक्षिकाओं का मोर्चा, कैशलेस चिकित्सा योजना के बहिष्कार का ऐलान

25 वर्षों से जारी 'दोहरी शिक्षण व शुल्क व्यवस्था' के विरोध में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों ने सीएम को सौंपा ज्ञापन

 

वाराणसी / डिजिटल डेस्क (भदैनी मिरर): उत्तर प्रदेश के 331 अनुदानित (एडेड) महाविद्यालयों में पिछले 25 वर्षों से चली आ रही दोहरी शिक्षण और दोहरी शुल्क व्यवस्था के विरोध में शिक्षकों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध महाविद्यालय इकाई की महामंत्री और महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश समन्वयक डॉ. मनीषा सिन्हा के नेतृत्व में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन प्रेषित किया है।

शिक्षकों का कहना है कि जब तक वेतन सुरक्षा और सेवा शर्तों की सुरक्षा गारंटी नहीं मिलती, तब तक मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना उनके लिए निरर्थक है। इसी के विरोध स्वरूप शिक्षकों ने इस योजना के बहिष्कार का ऐलान किया है।

क्या है 25 साल पुरानी 'दोहरी व्यवस्था' की समस्या?

डॉ. मनीषा सिन्हा के अनुसार, प्रदेश के अनुदानित डिग्री कॉलेजों में एक ही परिसर के भीतर दो तरह की व्यवस्थाएं चलाई जा रही हैं:

  1. वित्त पोषित पाठ्यक्रम (Government Aided Course): इसमें सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे विद्यार्थियों की फीस काफी कम होती है।

  2. स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम (Self-Finance Course): इसे सरकार की तरफ से कोई वित्तीय अनुदान नहीं मिलता।

इसके दुष्परिणाम स्वरूप:

  • विद्यार्थियों पर बोझ: स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सामान्य से 5 गुना अधिक फीस देनी पड़ती है।

  • शिक्षकों का शोषण: इन पाठ्यक्रमों को पढ़ाने वाले उच्च शिक्षित अध्यापकों को बेहद 'अल्प वेतन' (बौद्धिक मजदूरी) पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

9 वर्षों के आश्वासन के बाद भी ठोस निर्णय नहीं

शिक्षकों का आरोप है कि वर्तमान सरकार की ओर से पिछले 9 वर्षों में कई बार इस दोहरी व्यवस्था को समाप्त करने और शिक्षकों के विनियमितीकरण या निश्चित मानदेय का ठोस आश्वासन दिया गया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया।

"हमें कैशलेस चिकित्सा नहीं, जीविकोपार्जन हेतु अपना आशीर्वाद प्रदान करने की कृपा करें।"

शिक्षकों द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन का मुख्य अंश

कैशलेस चिकित्सा योजना के बहिष्कार की वजह

शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि बिना सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन के 'कैशलेस इलाज' जैसी योजनाएं बेमानी हैं। पेट भरने और जीवन यापन के लिए उचित मानदेय पहली प्राथमिकता है।

शिक्षकों ने काशी (महामना की कर्मभूमि) से मुख्यमंत्री से करबद्ध प्रार्थना की है कि नवरात्रि के इस पावन अवसर पर वे अपनी घोषणा से पिछले ढाई दशकों से चली आ रही इस विसंगति का अविलंब समाधान करें।

मांगें न पूरी होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि अब तक जनप्रतिनिधियों, शिक्षा मंत्री और शासन स्तर तक सभी लोकतांत्रिक प्रयास किए जा चुके हैं। यदि सरकार जल्द ही इस दोहरी शुल्क व शिक्षण व्यवस्था पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो शिक्षक संगठन के निर्णय के अनुसार प्रदेश स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।