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Kashi: सुमेरु पीठ के वरिष्ठ तपस्वी स्वामी अखंडानंद तीर्थ ब्रह्मलीन, केदार घाट पर दी गई जल समाधि

99 वर्ष की आयु में त्यागा पंचभौतिक शरीर; जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के सानिध्य में संपन्न हुआ अंतिम संस्कार

 

वाराणसी (भदैनी मिरर): धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी के संत समाज के लिए एक अत्यंत दुखद खबर है। काशी सुमेरु पीठ के वरिष्ठ और परम तपस्वी स्वामी अखंडानंद तीर्थ (गुरु चित्घनानंद तीर्थ) ने 99 वर्ष की आयु में प्रातः 11 बजे अपने पंचभौतिक शरीर का त्याग कर दिया और पंचतत्त्वों में विलीन हो गए। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर फैलते ही पूरी काशी के संत समाज, शिष्यों और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई है। आध्यात्मिक जगत इसे काशी के लिए एक अपूरणीय क्षति मान रहा है।

अस्सी घाट से निकली अंतिम यात्रा, केदार घाट पर दी गई जल समाधि

महान तपस्वी स्वामी अखंडानंद तीर्थ की अंतिम यात्रा अस्सी घाट से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नाव द्वारा प्रारंभ हुई। बाबा विश्वनाथ की नगरी के घाटों का परिभ्रमण करते हुए उनके पार्थिव शरीर को विश्वेश्वर तक ले जाया गया और फिर पुनः केदार घाट के समक्ष लाया गया। केदार घाट पर प्रतिष्ठित विद्वानों और संतों की उपस्थिति में वैदिक रीति-विधान व षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद पूर्ण विधि-विधान के साथ उन्हें गंगा जी में जल समाधि दी गई। कपाल क्रिया की रस्म उनके प्रिय शिष्य द्वारा पूरी की गई।

सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहा जीवन: शंकराचार्य

इस संपूर्ण वैराग्य यात्रा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के गरिमामयी सानिध्य और वैदिक निर्देशन में संपन्न हुई। स्वामी अखंडानंद तीर्थ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, "स्वामी अखंडानंद तीर्थ का पूरा जीवन तप, कठोर साधना, त्याग और सनातन धर्म के सिद्धांतों की रक्षा के लिए समर्पित था। ऐसे महान संत युगों में एक बार जन्म लेते हैं और समाज को भटकाव से दूर कर आध्यात्मिक मार्ग दिखाते हैं।"

अंतिम विदाई में उमड़ा काशी का संत समाज

अपने पूज्य संत को अंतिम विदाई देने के लिए काशी के कोने-कोने से संत-महात्मा और अखाड़ों के प्रतिनिधि उमड़ पड़े। अंतिम यात्रा में मुख्य रूप से सरोजानंद सरस्वती, बालेश्वरानंद तीर्थ, प्रकाश देव आश्रम, बिजूलिया वीर, चौसठ्ठी मठ, अनंत विज्ञान मठ, विमल देव आश्रम, मछली बंदर मठ, कोतवाल रणछोर आश्रम और मुनीश आश्रम सहित भारी संख्या में नागा संन्यासी, महामंडलेश्वर और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने नम आंखों से महान तपस्वी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।