वाराणसी मतदाता सूची 2026 में भारी गड़बड़ी, दूसरे वार्ड में जोड़े नाम, कहीं कन्नड़ तो कहीं गुजराती भाषा में छपी वोटर लिस्ट
वोटर लिस्ट में परिसीमन की उड़ी धज्जियां: लॉजिकल एरर बताकर काटे नाम, एक ही मकान नंबर पर दर्ज मिले कई मतदाता; जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग से शिकायत।
वाराणसी: जनपद वाराणसी में प्रकाशित की गई नई मतदाता सूची (2026) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मतदाता सूची का बारीकी से अवलोकन करने के बाद इसमें भारी स्तर पर त्रुटियां, तकनीकी खामियां और गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। इन गड़बड़ियों को लेकर अब लोकतंत्र की मूल भावना और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। इस संबंध में निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर तत्काल सुधार की मांग की गई है।
शिकायत में मतदाता सूची (2026) के निर्माण और संशोधन प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही के कई चौंकाने वाले बिंदु सामने रखे गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. नियमों की अनदेखी, नहीं दी गई फॉर्मों की जानकारी
निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देश थे कि प्रत्येक राजनैतिक दल को प्रति सप्ताह यह जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी कि कुल कितने फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 भरे गए हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर इस नियम का पालन नहीं किया गया और राजनीतिक दलों को यह महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया।
2. परिसीमन की उड़ी धज्जियां, दूसरे वार्ड में शिफ्ट किए वोटर
मतदाता सूची में नए परिसीमन का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया है। कई मतदाताओं को उनके मूल क्षेत्र के बजाय दूसरे वार्ड में जोड़ दिया गया है। उदाहरण के लिए, कैंट विधानसभा के मदनपुरा वार्ड (D-31) के कई मतदाताओं के नाम नियमों के विपरीत शिवाला वार्ड की मतदाता सूची में शामिल कर दिए गए हैं।
3. वैध मतदाताओं को नोटिस और SIR अभियान में धांधली
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जिन मतदाताओं के नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में विधिवत और सही तरीके से दर्ज हैं, उन्हें भी अनावश्यक रूप से नोटिस जारी कर परेशान किया जा रहा है।
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सबसे गंभीर मामला SIR अभियान का है। जिन मतदाताओं ने इस अभियान के तहत अपने पूरे सही दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा किया था, उनके नाम को 'लॉजिकल एरर' (Logical Error) बताकर लिस्ट से काट दिया गया। इसके विपरीत, जिन लोगों ने SIR फॉर्म भरा ही नहीं था, उनके नाम बिना किसी जांच के सूची में शामिल कर लिए गए।
4. एक पते पर दर्जनों वोटर और मकान नंबर 'शून्य'
वोटर लिस्ट में आवासीय विवरण को लेकर भारी लापरवाही बरती गई है। बड़ी संख्या में ऐसे लोग दर्ज हैं जो वर्तमान पते पर रहते ही नहीं हैं, जबकि कई मतदाताओं के नाम दो-दो स्थानों पर अंकित हैं।
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सैकड़ों मतदाताओं के मकान नंबर गलत दर्ज हैं, और कई प्रविष्टियों में तो मकान नंबर 'शून्य' (0) दर्शा दिया गया है।
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एक ही मकान के पते पर कई अलग-अलग मतदाताओं को दर्ज कर दिया गया है। इतना ही नहीं, एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग भाग संख्या (Part Number) पर दर्ज होने से परिवारों में भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
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ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं के फोटो अपडेट करने के बजाय अत्यंत पुराने फोटो ही लगा दिए गए हैं।
5. यूपी की वोटर लिस्ट में कन्नड़ और गुजराती भाषा!
लापरवाही की हद तब पार हो गई जब उत्तर प्रदेश के वाराणसी की वोटर लिस्ट में भाषाई त्रुटियां देखने को मिलीं। मतदाता सूची में कई मतदाताओं के नाम और विवरण कन्नड़ और गुजराती भाषा में प्रिंट कर दिए गए हैं, जिसे पढ़ पाना स्थानीय लोगों के लिए असंभव है।
त्वरित सुधार की मांग
इस गंभीर मामले को लेकर वाराणसी के जागरूक नागरिकों और राजनैतिक प्रतिनिधियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर इस त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची को दुरुस्त नहीं किया गया, तो हजारों वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग से मांग की गई है कि इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आपातकालीन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।