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₹2000 मानदेय में कैसे चले घर? 'समूह सखियों' ने खोला मोर्चा, 20 हजार रुपये मानदेय और स्मार्टफोन समेत रखीं 5 मुख्य मांगें

महंगाई के दौर में ₹66 प्रतिदिन की दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर हैं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं; मांगें पूरी न होने पर 2027 चुनाव में 'सत्ता पलटने' की दी चेतावनी।

 

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में जुटी 'समूह सखियों', 'आजीविका सखियों' और 'स्वास्थ्य सखियों' का सब्र अब जवाब दे चुका है। नाममात्र के मानदेय और सुविधाओं के अभाव में काम कर रही सैकड़ों महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी है। चिरगाँव, काशी विद्यापीठ, हरहुआ, चोलापुर, बड़ागाँव, पिण्डरा, आराजीलाइन और सेवापुरी समेत 8 विकास खंडों की लगभग 750 समूह सखियों ने सरकार के सामने अपनी दयनीय स्थिति और मांगों का पत्र रखा है।

"₹2000 में तो हर महीने का मोबाइल रिचार्ज भी भारी पड़ता है"

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में उन्हें मात्र ₹2000 प्रति माह का मानदेय मिलता है। यदि इसकी दैनिक आधार पर गणना की जाए, तो यह ₹66 प्रतिदिन बैठता है— जो कि एक सामान्य मजदूर की दिहाड़ी से भी काफी कम है।

पिंडरा, चोलापुर और काशी विद्यापीठ ब्लॉक से आईं मनीषा, पूनम विश्वकर्मा और राशि देवी ने सवाल उठाया कि इस महंगाई के दौर में ₹2000 में परिवार कैसे चले? उन्होंने कहा, "हमें ब्लॉक, जिले और बैठकों में दौड़ना पड़ता है। ₹350 का तो हर महीने मोबाइल रिचार्ज हो जाता है। घर वाले ताने देते हैं कि दिन-रात काम करने के बाद भी हाथ में कुछ नहीं आता।"




रैली और सरकारी कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने का दबाव

महिलाओं ने प्रशासन और नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी कोई सरकारी कार्यक्रम या नेताओं की रैली होती है, तो समूह सखियों को ही महिलाओं की भीड़ जुटाने का टारगेट दिया जाता है। अधिकारियों और प्रधानों के माध्यम से दबाव बनाया जाता है कि बसें भेजी जा रही हैं और महिलाओं को लेकर आना है।

प्रदर्शनकारी महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि यदि समूह सखियां मना कर दें, तो रैलियों में भीड़ नहीं जुटेगी। इसके बावजूद जब मानदेय और हक की बात आती है, तो सरकार उनकी सुध नहीं लेती।

ज्ञापन में शामिल 5 प्रमुख मांगें:

समूह, आजीविका एवं स्वास्थ्य सखियों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और उच्च अधिकारियों को 5 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है:

  1. ₹20,000 प्रतिमाह मानदेय: वर्तमान ₹2000 मानदेय को बढ़ाकर ₹20,000 किया जाए, ताकि उनके काम और जिम्मेदारियों का उचित पारिश्रमिक मिल सके।

  2. स्मार्टफोन और रिचार्ज की सुविधा: एमआईएस (MIS), ऑनलाइन डेटा एंट्री, लोकोस ऐप (Locos App) और रिपोर्टिंग के लिए सरकारी स्तर पर स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाए और उसके रिचार्ज का खर्च दिया जाए।

  3. व्यक्तिगत खाते में सीधा भुगतान (Direct Bank Transfer): पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मानदेय किसी तीसरे माध्यम के बजाय सीधे सखियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में भेजा जाए।

  4. स्थाई नियुक्ति व निश्चित कार्यक्षेत्र: सखियों को स्थायी नियत कार्य के आधार पर नियुक्त किया जाए, जिससे उनके कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारी की स्पष्ट सीमा निर्धारित हो सके।

  5. यात्रा भत्ता (TA) व सुरक्षा बीमा: गांव-गांव सर्वे, फॉलो-अप और बैठकों के लिए जाने-आने का वाहन किराया (यात्रा भत्ता) और फील्ड वर्क के दौरान किसी भी अनहोनी से बचाव के लिए सुरक्षा बीमा (Insurance) दिया जाए।


2027 के चुनाव को लेकर दी कड़ी चेतावनी

अपनी मांगों पर अड़ी समूह सखियों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो वे कामकाज पूरी तरह ठप कर देंगी और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगी।

2027 के आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी, "अगर सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं करेगी, तो हम भी अपनी मर्जी की सरकार चुनेंगे। हममें इतनी ताकत है कि जिधर चाहेंगे, उधर सरकार पलट देंगे।"