IIT BHU और भारतीय नौसेना के बीच ऐतिहासिक MoU: स्वदेशी रक्षा और नौसैनिक तकनीकों को मिलेगा नया आयाम
नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में हुआ समझौता; AI, रडार, रोबोटिक्स और समुद्री इंजीनियरिंग में संयुक्त अनुसंधान करेंगे IIT BHU और नेवी।
भदैनी मिरर, वाराणसी। देश में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों (Defense Technologies) के विकास और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) वाराणसी और भारतीय नौसेना के बीच 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता 3 वर्षों के प्रारंभिक कार्यकाल के लिए प्रभावी रहेगा, जो रक्षा अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रखेगा।
शीर्ष सैन्य अधिकारियों व शिक्षाविदों की उपस्थिति में हुए हस्ताक्षर
नौसेना मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमओयू पर भारतीय नौसेना के कंट्रोलर ऑफ मैटेरियल (COM) वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार (AVSM, VSM) तथा IIT (BHU) के डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए।
इस दौरान आईआईटी (बीएचयू) के आउटरीच एंड इंडस्ट्री रिलेशंस के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव और सलाहकार डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इन अत्याधुनिक तकनीकों पर होगा संयुक्त रिसर्च
इस ऐतिहासिक साझेदारी के तहत दोनों संस्थान मिलकर भारतीय नौसेना की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का विकास करेंगे। अनुसंधान का मुख्य दायरा निम्नलिखित क्षेत्रों में होगा:
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उन्नत हथियार एवं सेंसर प्रणाली (Advanced Weapons & Sensors)
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML)
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रडार प्रणाली और पानी के भीतर वस्तुओं की पहचान
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क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा (Quantum Tech & Cybersecurity)
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रोबोटिक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत सामग्री (Advanced Materials)
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समुद्री इंजीनियरिंग (Marine Engineering) और नौसैनिक अवसंरचना
"भविष्य की समुद्री चुनौतियों का मिलेगा सटीक समाधान" — वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार
साझेदारी पर विचार रखते हुए वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार ने कहा कि यह समझौता भारतीय नौसेना और देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के संबंधों को नई मजबूती देगा। IIT (BHU) के बहुविषयक अनुसंधान से भविष्य की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का स्वदेशी और प्रभावी समाधान निकालने में मदद मिलेगी।
वहीं, आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस एमओयू का स्वागत करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और देश के रणनीतिक संगठनों की यह साझेदारी 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
स्टार्टअप्स और युवा शोधकर्ताओं को मिलेंगे नए अवसर
प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस समझौते के तहत संयुक्त कार्यशालाएं, सेमिनार और सहयोगात्मक R&D प्रोजेक्ट्स चलाए जाएंगे। इसके साथ ही IIT (BHU) के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स को भी भारतीय नौसेना के अनुसंधान प्रतिष्ठानों के साथ सीधे काम करने का मौका मिलेगा, जिससे युवाओं के नवाचार को राष्ट्रीय सुरक्षा के मंच पर पहचान मिलेगी।