BHU में 16वें राष्ट्रीय सम्मेलन 'ट्रॉमा 2026' का भव्य उद्घाटन, कुलपति बोले- ट्रॉमा केयर से बच सकती हैं अनमोल जिंदगियां
बीएचयू के के.एन. उडुपा सभागार में 8 से 11 अक्टूबर तक चलेगा चार दिवसीय 'TRAUMA 2026'; देशभर के विशेषज्ञ इमरजेंसी मेडिसिन और उन्नत इलाज पर कर रहे मंथन।
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) स्थित के. एन. उडुपा सभागार में शुक्रवार (9 अक्टूबर 2026) को इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर (ISTAC) के 16वें वार्षिक सम्मेलन ‘ट्रॉमा 2026’ का औपचारिक उद्घाटन हुआ।
‘Beyond the Golden Hour- Leveling Up Trauma Care’ विषयवस्तु (Theme) पर आधारित यह चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 8 से 11 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रॉमा और इमरजेंसी केयर के क्षेत्र में आधुनिक एवं साक्ष्य-आधारित उपचार विधियों, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के अनुभवों को साझा करना है।
"सड़क सुरक्षा और समय पर इलाज से बचेगा अर्थव्यवस्था का नुकसान"
समारोह के मुख्य अतिथि एवं बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि दुर्घटनाओं के मामलों में युवा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को एडवांस्ड ट्रेनिंग देना समय की मांग है।
उन्होंने कहा, "सड़क दुर्घटनाएं देश में असमय मौतों का बड़ा कारण हैं। परिवहन एवं ट्रैफिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के सहयोग से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) की पहचान कर जागरूकता अभियान चलाना होगा। ट्रॉमा केयर में सही समय पर निवेश करने से न केवल बहुमूल्य जिंदगियां बचाई जा सकती हैं, बल्कि पीड़ित परिवारों और देश की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकता है।"
एम्बुलेंस से लेकर ओटी तक तालमेल जरूरी: प्रो. एम.सी. मिश्रा
ISTAC के अध्यक्ष प्रो. एम. सी. मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि घायल मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले की देखभाल (Pre-hospital care), एम्बुलेंस सुविधा और अस्पताल पहुंचने के बाद त्वरित इलाज का आपस में बेहतर तालमेल होना जरूरी है। उन्होंने उपचार व्यवस्था में कमियों की पहचान के लिए 'ट्रॉमा रजिस्ट्री' लागू करने और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को लगातार प्रशिक्षित करने पर जोर दिया।
"हर एक मिनट है कीमती"
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प्रो. एस. एन. संखवार (निदेशक, IMS-BHU): उन्होंने कहा कि गंभीर चोट या दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद संवेदनशील होते हैं। बीएचयू में एडवांस्ड ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (ATLS) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) के जरिए स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास पर लगातार काम किया जा रहा है।
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प्रो. शम्पा अनुपुरबा (प्रभारी संकाय प्रमुख): उन्होंने कहा कि ट्रॉमा प्रबंधन एक सामूहिक प्रयास (Team Work) है। एम्बुलेंस ड्राइवर, नर्स, टेक्नीशियन से लेकर सर्जन तक सभी का तालमेल मरीज की जान बचाता है।
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प्रो. एस. के. भारतीय (आयोजन अध्यक्ष व विभागाध्यक्ष, सर्जरी): स्वागत भाषण देते हुए उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन देश-विदेश के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।