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वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा, नौका संचालन पर लगी रोक; 11वीं NDRF अलर्ट पर

गंगा का जलस्तर 65 मीटर पहुंचा, 6 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से हो रही वृद्धि; सुरक्षा के मद्देनजर वॉटर एम्बुलेंस और NDRF की टीमें 24×7 तैनात।

 

वाराणसी (भदैनी मिरर)। धर्मनगरी वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट गेज साइट के आंकड़ों के अनुसार, गंगा का जलस्तर 65 मीटर के करीब पहुंच चुका है और इसमें लगभग 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटों में जलस्तर में करीब 86 सेमी की बढ़ोतरी देखी गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए प्रशासन ने नाव संचालन पर अग्रिम आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

अस्सी घाट पर लापरवाही, पुलिस प्रशासन मुस्तैद

जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है। नदी में चल रही नावों को वापस किनारे पर बुलाया जा रहा है। हालांकि, इस बीच अस्सी घाट से नाविकों द्वारा प्रशासन और पुलिस के निर्देशों की अनदेखी करने की सूचना भी सामने आई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए सभी नाविकों को सुरक्षा दिशा-निर्देशों (Do's & Don'ts) का कड़ाई से पालन करना होगा।

11वीं NDRF की 24×7 निगरानी और वॉटर एम्बुलेंस तैनात

गंगा की विभीषिका और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 11वीं एनडीआरएफ, वाराणसी पूरी तरह से मुस्तैद हो गई है। कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में एनडीआरएफ की टीमें गंगा नदी में दिन-रात बोट पेट्रोलिंग कर रही हैं।

जन-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नदी क्षेत्र में मेडिकल टीम के साथ वॉटर एम्बुलेंस को 24×7 तैनात रखा गया है, ताकि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। एनडीआरएफ द्वारा लाउडस्पीकर के माध्यम से आमजन, पर्यटकों और नाविकों को नदी से दूर रहने और सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।

जलस्तर के आंकड़े (राजघाट गेज साइट):

  • चेतावनी स्तर (Warning Level): 70.262 मीटर

  • खतरा स्तर (Danger Level): 71.262 मीटर

  • उच्चतम जलस्तर (H.F.L.): 73.901 मीटर

  • बढ़ने की दर: ~6 सेमी/घंटा

प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर सामान्य होने और नदी की परिस्थितियों में सुधार आने के बाद ही नाव संचालन दोबारा शुरू करने के संबंध में नया आदेश जारी किया जाएगा।